वरिष्ठ पत्रकार: काजल, शिमला
पंजाब दस्तक ब्यूरो
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार के सरकारी विश्राम गृहों और भवनों में अब ठहरना आम आदमी की पहुंच से पूरी तरह बाहर होता नजर आ रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा 8 सितंबर 2026 को जारी ताजा अधिसूचना के तहत नई दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला स्थित राज्य के प्रमुख सरकारी भवनों के चयनित कमरों का किराया सीधे 3,000 रुपये प्रतिदिन (सभी करों सहित) निर्धारित कर दिया गया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है। सरकार के इस फरमान के बाद जनता में गहरा रोष पनप रहा है और लोग तीखे सवाल खड़े करते हुए पूछ रहे हैं—क्या यही व्यवस्था परिवर्तन है?
होटलों से भी महंगा हुआ सरकारी कमरा, जनता में भारी उबाल
सरकार के इस फैसले पर आम जनता और कर्मचारियों ने कड़ी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि 1000 से 1500 रुपये तक में तो दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला के निजी होटलों में आसानी से अच्छे कमरे मिल जाते हैं, फिर सरकारी भवनों में रुकने के लिए गरीब और मध्यम वर्ग 3000 रुपये क्यों चुकाए? जनता का सीधा तर्क है कि मंत्रियों, विधायकों, माननीयों और आला अफसरों की जेब पर तो इस भारी-भरकम दर से रत्ती भर फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि उनका पूरा बिल सरकार के खाते से टीए/डीए के रूप में पास हो जाएगा।
लेकिन सवाल उन बेबस ग्रामीणों, किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों का है जो अपने बच्चों को दिल्ली एयरपोर्ट छोड़ने, चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज कराने या शिमला प्रशासनिक दफ्तरों में पैरवी के लिए पहुंचते हैं। आधी दर पर बाहर होटल उपलब्ध होने के बावजूद सरकारी आशियानों के इस बेतहाशा किराए ने आम हिमाचली को बेगाना कर दिया है।
24 कमरों के लिए ऑनलाइन व्यवस्था, एडवांस भुगतान अनिवार्य
अधिसूचना के अनुसार, कुल 24 चयनित कमरों को आधिकारिक वेब पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग के दायरे में बांधा गया है:
हिमाचल भवन, नई दिल्ली: 07 कमरे
हिमाचल सदन, नई दिल्ली: 04 कमरे
हिमाचल भवन, चंडीगढ़: 06 कमरे
विली पार्क सर्किट हाउस, शिमला: 07 कमरे
नई व्यवस्था में कमरा तभी बुक माना जाएगा जब 3000 रुपये का पूरा किराया ऑनलाइन माध्यमों—नेट बैंकिंग, यूपीआई, क्यूआर कोड अथवा कार्ड—से एडवांस जमा होगा। कार्य दिवसों में 30% बुकिंग दोपहर 12:00 बजे तक और बाकी बुकिंग शाम 5:00 बजे तक निपटाने की समय सीमा तय की गई है।
कैंसिलेशन पर भी कड़े नियम
बुकिंग रद्द कराने के नियम भी सख्त कर दिए गए हैं। 24 घंटे पहले रद्दीकरण कराने पर 10% कटौती के बाद शेष राशि वापस मिलेगी, जबकि चेक-इन से 24 घंटे के भीतर कैंसल कराने पर पूरा किराया जब्त हो जाएगा। केवल जीएडी द्वारा स्वयं बुकिंग रद्द किए जाने पर ही पूरी राशि आवेदक के खाते में लौटाई जाएगी।
सरकारी भवनों में पारदर्शिता लाने के नाम पर तय की गई इस भारी-भरकम 3,000 रुपये की दर ने अब सरकार की मंशा पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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