विधानसभा परिसर से सुरेंद्र राणा की रिपोर्ट
शिमला: हिमाचल प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा और सड़क किनारे धड़ल्ले से होने वाले अवैध निर्माणों पर अब प्रदेश सरकार ने पूरी तरह नकेल कस दी है। विधानसभा में बहुप्रतीक्षित हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। यह कानून केवल नियमों की कागजी किताब नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सड़कों के रखरखाव, त्वरित बहाली और जवाबदेही को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
अब तक पहाड़ी सड़कों पर मनमर्जी से कटिंग करने, ड्रेनेज बंद करने या अवसंरचना को नुकसान पहुंचाकर बच निकलने का दौर अब समाप्त हो गया है। नए कानून के तहत सड़क की सीमा तय करने से लेकर क्षतिग्रस्त पुलों की बहाली और लापरवाह लोगों से खर्चे की पाई-पाई वसूलने का पुख्ता बंदोबस्त कर दिया गया है।
कानून के बड़े फैसले: जानिए आम जनता और सिस्टम पर क्या होगा असर
डिजिटल मैपिंग का पहरा, खत्म होगा बार-बार का सीमांकन झंझट:
अब प्रदेश भर की सड़कों का डिजिटल और जियो-कोऑर्डिनेट मानचित्र एक ही बार में तैयार कर लिया जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि निर्माण कार्यों, एनओसी या किसी विवाद की स्थिति में बार-बार मौके पर फीता लेकर नाप-नखश और भौतिक सीमांकन कराने के सरकारी चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी होगा और एनओसी की फाइलें महीनों नहीं लटकेंगी।
सड़क या पुल को पहुंचाया नुकसान, तो जेब होगी ढीली:
पहाड़ों में निजी निर्माण या लापरवाही के चलते अक्सर सड़कें धंसती हैं या नालियां चोक हो जाती हैं। नए प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि से सड़क, पुलिया या ड्रेनेज को नुकसान हुआ, तो लोक निर्माण विभाग बिना देरी किए तुरंत मरम्मत करवाएगा। खास बात यह है कि इस मरम्मत का पूरा खर्च और साथ में भारी जुर्माना नुकसान पहुंचाने वाले की जेब से ही वसूला जाएगा।
खतरे की स्थिति में विभाग को सड़क बंद करने की खुली छूट:
जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। आपात स्थिति, भूस्खलन के खतरे या जरूरी मरम्मत के समय विभाग को यह वैधानिक अधिकार मिल गया है कि वह किसी भी सड़क या उसके हिस्से को यातायात के लिए तुरंत प्रतिबंधित या बंद कर सके।
हर चूक अब जुर्म नहीं, आम आदमी को बड़ी राहत:
कानून को व्यावहारिक बनाते हुए छोटे-मोटे उल्लंघनों और गलतियों पर सीधे आपराधिक केस दर्ज करने की सख्त व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। यानी आम लोगों को बेवजह कानूनी मुकदमों में नहीं घसीटा जाएगा।
आपत्ति और अपील के लिए मिला अतिरिक्त समय:
विभागीय फैसलों के खिलाफ अपनी बात रखने और अपील करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो और प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
विधेयक पर लोक निर्माण मंत्री का सीधा संदेश:
”संशोधनों का लक्ष्य हिमाचल की सड़क अवसंरचना को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना, जनता से जुड़ी अनुमतियों की प्रक्रिया में तेजी लाना, सड़कों का प्रभावी रखरखाव एवं समय पर मरम्मत सुनिश्चित करना और प्रवर्तन व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और जनसुलभ बनाना है। राज्य सरकार सड़क अवसंरचना की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है और विभागीय प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं जन-हितैषी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।”
— विक्रमादित्य सिंह, लोक निर्माण मंत्री, हिमाचल प्रदेश
ऐसी ही निष्पक्ष और धारदार खबरों के लिए देखते रहिए पंजाब दस्तक। चैनल को लाइक करें, सब्सक्राइब करें और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
सच की आवाज़, जनता की आवाज़ — पंजाब दस्तक

