शिमला में अवैध पार्किंग और सड़क अतिक्रमण से ट्रैफिक जाम

5 करोड़ सैलानियों का लक्ष्य और सड़कों पर अवैध कब्जा: डीसी-एसपी की सुस्ती से हांफ रहा हिमाचल; शिमला से मनाली तक घंटों जाम में पिस रही जनता

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​विधानसभा परिसर से ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा की ग्राउंड रिपोर्ट
​शिमला: हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और पर्यटन की जन्नत कहा जाता है, जहां सरकार ने सालाना 5 करोड़ सैलानियों के स्वागत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। लेकिन इस हसीन तस्वीर का स्याह पहलू यह है कि पूरे प्रदेश की सड़कें आज वाहनों के अनियंत्रित सैलाब, अवैध कब्जों और जिला स्तर के अफसरों की घोर सुस्ती के दलदल में बुरी तरह फंस चुकी हैं।


​यदि सिर्फ राजधानी शिमला की बात करें, तो यहां 1.92 लाख स्थानीय गाड़ियां पंजीकृत हैं। शहर की भौगोलिक स्थिति पहले से ही संकरी है, उस पर 50-60 रुपये की पार्किंग पर्ची बचाने के लालच में लोग अपनी गाड़ियां खुलेआम मुख्य सड़कों पर लावारिस खड़ी कर देते हैं। जहां पार्किंग स्थल मौजूद हैं, वहां गाड़ियां खड़ी न करके सड़क किनारे बेतरतीब कब्जा जमाया जा रहा है, और पुलिस-प्रशासन इस खुली मनमानी पर आंखें मूंदे तमाशा देख रहा है।


​करोड़ों के डंगे और चौड़ी सड़कें बनीं मुफ्त पार्किंग; 40 साल पुरानी स्थिति पर खड़ी है व्यवस्था
​सरकारें हर साल करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करके पहाड़ काटकर सड़कें चौड़ी कर रही हैं, भारी-भरकम बजट से डंगे (रिटेनिंग वॉल) लगाए जा रहे हैं। लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि लोक निर्माण विभाग जहां-जहां सड़क चौड़ी करता है या नया डंगा लगाता है, लोग उसी चौड़ी जगह पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। नतीजा यह कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी चलने के लिए सड़क उतनी ही संकरी बचती है, जितनी 40-50 वर्ष पहले हुआ करती थी। जनता के टैक्स का पैसा सड़कों को खुला करने के लिए लगता है, लेकिन वह लोगों की निजी पार्किंग बनकर रह जाता है।


​सड़कों किनारे अवैध ढाबों-दुकानों की भरमार: घोड़ा चौकी से ढली तक सरकारी संरक्षण का खेल
​सड़क किनारे केवल गाड़ियां ही नहीं, बल्कि अवैध फड़, सब्जियां और फलों की दुकानें जाम का सबसे बड़ा नासूर बन चुकी हैं। लोग बीच सड़क पर गाड़ियां रोककर फल-सब्जी खरीदने खड़े हो जाते हैं, जिससे पीछे मीलों लंबा जाम लग जाता है।
​घोड़ा चौकी का खुला सच: यहां सड़क किनारे पहले गाड़ियों में सब्जियां बेचना शुरू हुआ, फिर कच्चे ढारे बने और अब पक्की दुकानें खड़ी हो चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की नाक के नीचे इन अवैध कब्जों को बाकायदा सरकारी बिजली और पानी के कनेक्शन तक बांट दिए गए। सवाल यह उठता है कि अवैध कब्जों को बिजली-पानी देने वाले उन लापरवाह अफसरों पर कानूनी डंडा कब चलेगा?
​चारों तरफ एक जैसा हाल: घोड़ा चौकी हो या तारा देवी, संकट मोचन, शोघी, न्यू शिमला, बीसीएस, संजौली, लक्कड़ बाजार या ढली बाईपास—हर जगह सड़क किनारे अवैध कब्जों का जाल बिछा हुआ है।


​हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम और प्रशासन का पीला पंजा शिमला शहर के मुख्य बाजारों तक तो चल रहा है, लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ बाजारों तक सीमित क्यों है? यह कानूनी डंडा इन मुख्य सड़कों और हाईवे किनारे बैठे अवैध कब्जाधारियों पर कब चलेगा?


​मुख्यमंत्री नहीं, डीसी और एसपी तय करें जिम्मेदारी: अफसरशाही की नाकामी का शिकार आम जनता
​सड़कों से अतिक्रमण हटाना, अवैध पार्किंग पर नकेल कसना और सुचारू यातायात सुनिश्चित करना मुख्यमंत्री या आला प्रशासनिक सचिवों का रोजमर्रा का काम नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रदेश के सभी 12 जिलों के डीसी और जिला पुलिस कप्तानों (एसपी) की सीधी जवाबदेही है। अफसर अपने वातानुकूलित दफ्तरों से निकलकर फील्ड में उतरने को तैयार नहीं हैं, और उनकी इस नाकामी की सजा आम गरीब जनता भुगत रही है:
​अस्पताल जाने वालों पर आफत: दूर-दराज के गांवों से गंभीर मरीजों को लेकर निकलीं एंबुलेंस घंटों तक जाम में फंसी कराहती रहती हैं।


​कर्मचारी और स्कूली बच्चे परेशान: सरकारी कर्मचारी अपने दफ्तरों और नन्हें बच्चे अपने स्कूलों में समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
​फर्जी पार्किंग प्रमाण पत्र: पहाड़ों में घर नीचे खाई में हैं या ऊपर चढ़ाई पर, लेकिन गाड़ियां सबकी मुख्य सड़क पर ही खड़ी रहती हैं। आरटीओ में झूठे पार्किंग प्रमाण पत्र देकर रजिस्ट्रेशन करा लिया जाता है। जब तक ऐसे फर्जीवाड़े और सड़कों पर खड़ी गाड़ियों पर बुलडोजर जैसी निर्णायक कार्रवाई नहीं होगी, हालात नहीं सुधरेंगे।


​ई-वाहनों को बढ़ावा: सरकार दे रही भारी रियायतें
​बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल के दबाव को कम करने के लिए राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की विशेष नीति लागू की है। श्रम एवं रोजगार विभाग की योजनाओं के तहत ई-वाहनों पर बड़ा अनुदान दिया जा रहा है:
​100% छूट: इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण शुल्क, परमिट और टोल टैक्स में पूरी 100 फीसदी छूट दी गई है।
​स्पेशल रोड टैक्स में राहत: स्पेशल रोड टैक्स (SRT) में भी 50% की सीधी रियायत दी जा रही है ताकि हरित परिवहन को बढ़ावा मिले।
​सरकार की यह नीतियां तभी सार्थक साबित होंगी जब पुलिस और जिला प्रशासन नींद से जागेगा, सड़कों से अवैध कब्जे हटवाएगा और अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा।


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