हिमाचल में 5 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के DA संकट और लंबित एरियर का मुद्दा

हिमाचल में 5 लाख कर्मचारियों-पेंशनरों के DA पर मंडराया बड़ा संकट: सरकार पर डीए फ्रीज व खत्म करने की साजिश का आरोप — महासंघ का दावा: हर कर्मी पर ₹2.5 लाख की देनदारी

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​शिमला (पंजाब दस्तक न्यूज़ रूम / ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा):
​हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर गहराता असंतोष अब बड़े वित्तीय और नीतिगत टकराव का रूप ले चुका है। स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के राज्य स्तरीय समारोह में देय डीए किस्त जारी करने को लेकर कोई घोषणा न होने से नाराज हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। महासंघ ने खुला आरोप लगाया है कि सरकार कर्मचारियों के डीए को धीरे-धीरे खत्म करने या स्थाई रूप से फ्रीज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


​वित्तीय संकट और आंकड़ों का पूरा गणित
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव हीरालाल वर्मा ने विस्तृत वित्तीय आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि डीए के निरंतर लंबित रहने से बोर्ड व निगमों सहित प्रदेश के करीब 5 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को अपूरणीय आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है:
​₹5,000 करोड़ का संचित एरियर: प्रदेश में डीए का संचित बकाया (एरियर) बढ़कर करीब ₹5,000 करोड़ के भारी-भरकम स्तर पर पहुंच चुका है।


​₹2,500 करोड़ का वार्षिक अतिरिक्त भार: 15% लंबित डीए के रूप में कर्मचारियों और पेंशनरों को हर साल ₹2,500 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जाना बाकी है।
​प्रति कर्मचारी ₹2.5 लाख से अधिक देनदारी: महासंघ के आकलन के अनुसार, वर्तमान में औसतन प्रत्येक कर्मचारी पर सरकार की ₹2.5 लाख से अधिक की डीए देनदारी बनती है।
​4% के बजाय 3% जारी करने की मिसाल: महासंघ ने हाल ही में 4% के स्थान पर केवल 3% किस्त जारी करने के फैसले को सरकार की टालमटोल और कटौती की नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया।


​14 महीने का बचा कार्यकाल और डीए फ्रीज होने की आशंका
कर्मचारी नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार का करीब 14 महीने का कार्यकाल शेष रह गया है। यदि इस निर्धारित समयावधि में सरकार ने लंबित किस्तों और एरियर का चरणबद्ध निपटारा नहीं किया, तो आगामी सरकार के कार्यकाल में भी इसके भुगतान की संभावनाएं बेहद क्षीण हो जाएंगी। इससे कर्मचारियों का वैध डीए स्थाई रूप से लंबित अथवा फ्रीज होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।


​’डीए कोई खैरात नहीं, वेतन-पेंशन का वैधानिक अधिकार’
महासंघ ने दो-टूक शब्दों में कहा कि महंगाई भत्ता कोई वैकल्पिक सुविधा या सरकारी मेहरबानी नहीं, बल्कि वेतन और पेंशन का अनिवार्य व अभिन्न हिस्सा है। निरंतर बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों और पेंशनरों की घटती क्रय शक्ति की भरपाई इसी भत्ते से होती है। डीए रोकने से मध्यमवर्गीय कर्मचारियों के घरेलू बजट पर सीधा प्रहार हो रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में व्यापक रोष की स्थिति बन चुकी है।


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