एसपी शिमला आवास साउथवुड मरम्मत विवाद पर विजिलेंस जांच

​बड़ा खुलासा: एसपी शिमला के सरकारी आवास पर चले ‘खर्चीले चाबुक’ पर मचा हड़कंप!​शोघी पुलिस चौकी के मरम्मत बजट पर फेरा पानी, एसपी की कोठी पर उड़ाए लाखों?

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पंजाब दस्तक EXCLUSIVE
​शिमला (पंजाब दस्तक / प्रियंका):


राजधानी शिमला में प्रशासनिक और खाकी गलियारों से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आ रही है। शिमला के सबसे हाई-प्रोफाइल सरकारी आवास—’साउथवुड’ (एसपी आवास) की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर हुए लाखों रुपये के खर्च ने खाकी के दामन पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।


​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है और तत्कालीन एसपी संजीव कुमार गांधी समेत इस पूरे खेल में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की विजिलेंस जांच की सिफारिश कर दी है।


​क्या है ‘बजट के खेल’ की पूरी कहानी?
​रिपोर्ट्स के अनुसार, एसपी आवास ‘साउथवुड’ के रखरखाव पर कुल ₹14,07,392 (14.07 लाख) की राशि खर्च की गई। लेकिन असली पेंच इस खर्च के पीछे की प्रक्रिया और पैसों के सोर्स में फंसा है:
​चौकी के पैसों का इस्तेमाल?: एसडीएम कंडाघाट/क्योग द्वारा ₹2.50 लाख का बजट मूल रूप से पुलिस चौकी शोघी की मरम्मत और बुनियादी ढाँचे को सुधारने के लिए स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि पुलिस चौकी के लिए आए इस बजट को वहां लगाने के बजाय एसपी आवास पर खर्च कर दिया गया।
​आवासीय मद से बड़ा खर्च: बाकी के ₹11,57,392 जिला पुलिस के आवासीय मद से निकाल कर इस कोठी की मरम्मत पर खर्च किए गए।


​30 जुलाई की रिपोर्ट से हिला प्रशासनिक अमला
​इस पूरे मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब 30 जुलाई को वर्तमान एसएसपी शिमला ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 के दौरान हुए इस पूरे वित्तीय खेल, प्रक्रियात्मक कमियों और सरकारी धन के उपयोग पर सीधे सवाल खड़े किए गए।


​3-सदस्यीय विशेष ऑडिट समिति गठित: 7 दिन में सौंपी जाएगी रिपोर्ट
​मामले के सामने आते ही पुलिस मुख्यालय हरकत में आ गया है। तथ्यात्मक पड़ताल के लिए 3-सदस्यीय विशेष ऑडिट समिति (Special Audit Committee) का गठन कर दिया गया है। समिति को 1 सप्ताह (7 दिन) के भीतर अपनी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।


​ऑडिट समिति के रडार पर रहेंगे ये दस्तावेज:
​प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां (Administrative & Financial Approvals)
​टेंडर प्रक्रिया, खरीद रिकॉर्ड और कोटेशन
​बिल, वाउचर, कैश बुक, माप पुस्तिका (MB)
​कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Work Completion Certificate) और भुगतान रिकॉर्ड


​पंजाब दस्तक की नज़र:
जनता के टैक्स और सरकारी मद के एक-एक पैसे का हिसाब होना पारदर्शी प्रशासन की पहली शर्त है। जब बजट की मर्यादा पर सवाल उठें, तो जांच होना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि 7 दिनों के भीतर आने वाली ऑडिट रिपोर्ट और विजिलेंस जांच में क्या नए खुलासे होते हैं!


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​विशेष रिपोर्ट: प्रियंका
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