पंजाब दस्तक | हमीरपुर समाचार
सुपर एक्सक्लूसive रिपोर्ट
वरिष्ठ पत्रकार: उमांशी राणा
हमीरपुर (पंजाब दस्तक ब्यूरो):
डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज के नए और भव्य परिसर का उद्घाटन होने से पहले ही एक बड़ा वित्तीय संकट सामने आ गया है। हमीरपुर से करीब 9 किलोमीटर दूर जोल सप्पर में बने नए मेडिकल कॉलेज भवन का अभी औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है और संस्थान ₹80 लाख से अधिक के भारी-भरकम बिजली बिल के झटके से दहल गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य विद्युत बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को बिल न भरने की सूरत में 7 दिनों के भीतर भुगतान करने का अल्टीमेटम थमा दिया है।
2 साल से तैयार हैं भवन, हैंडओवर से पहले ही बढ़ा बिलों का बोझ
गौरतलब है कि जोल सप्पर में अस्पताल और एकेडमिक ब्लॉक पिछले 2 वर्षों से बनकर पूरी तरह तैयार हैं। यहां बिजली के कनेक्शन भी जोड़े जा चुके हैं और विद्युत आपूर्ति लगातार चालू है, जिसके चलते बिजली का बिल लगातार बढ़ता जा रहा है।
वर्तमान स्थिति: परिसर में गतिविधियों की शुरुआत के साथ ही बिजली की खपत जारी है।
आगे का संकट: आने वाले दिनों में यहां 5 मुख्य विभाग शिफ्ट होने जा रहे हैं, जिसके बाद बिजली की खपत कई गुना और बढ़ जाएगी।
बकाया राशि: विद्युत बोर्ड द्वारा ₹80,85,101 का बिल पेंडिंग दर्शाया गया है।
हालांकि यह मेडिकल कॉलेज का अपना ही भवन है और इसका बिल भी कॉलेज प्रशासन को ही चुकाना है, लेकिन पेच यह फंसा है कि यह भवन आधिकारिक रूप से अभी तक हैंडओवर ही नहीं हो पाया है और हैंडओवर की प्रक्रिया अभी भी चल रही है।
’पंजाब दस्तक’ पर प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती का आधिकारिक बयान
इस पूरे मामले पर डॉ. रमेश भारती (प्रिंसिपल, डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर) ने ‘पंजाब दस्तक’ से विशेष बातचीत करते हुए स्थिति स्पष्ट की।
प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती की प्रतिक्रिया:
“मेडिकल कॉलेज के नए भवन को हैंडओवर करने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। जो विद्युत बोर्ड का पेंडिंग बिल है, उसे जल्द से जल्द भरा जा सके, इस पर प्रमुखता से कार्य किया जा रहा है। अगले महीने तक फर्नीचर आने से लेकर पूरी शिफ्टिंग का कार्य संपन्न होना है, इसलिए इस व्यवस्था को समय रहते सुचारू कर लिया जाएगा।”
’पंजाब दस्तक’ का बड़ा सवाल
2 साल से भवन तैयार होने के बावजूद हैंडओवर प्रक्रिया का लटकना और अब उद्घाटन की दहलीज़ पर ₹80 लाख का बिल पेंडिंग होना प्रशासनिक तालमेल पर गंभीर सवाल उठाता है। आगामी दिनों में 5 नए विभागों की शिफ्टिंग और फर्नीचर आने के बाद बिजली की खपत और बढ़ेगी। ऐसे में अब देखना यह होगा कि कॉलेज प्रबंधन विद्युत बोर्ड के 7 दिनों के अल्टीमेटम के भीतर इस भारी-भरकम राशि का बंदोबस्त कब और कैसे करता है।
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