विशेष रिपोर्ट: उमांशी राणा (पंजाब दस्तक, हमीरपुर)
हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान पूरी तरह गरमा गया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि भाजपा कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए ओपीएस को बंद करना चाहती है और उसकी जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) थोपने की फिराक में है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जबकि भाजपा का चरित्र हमेशा से कर्मचारी विरोधी रहा है।

हमारी संस्कृति में सुशासन और समाज के रक्षकों व सेवकों के कल्याण को सर्वोपरि माना गया है, जैसा कि कहा भी गया है:
”लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु। राजानो धर्मिका भवन्तु॥”
(अर्थात: संसार में सभी लोग सुखी रहें और शासक हमेशा न्याय व धर्म के मार्ग पर चलते हुए प्रजा का कल्याण करे।)
इसी लोक-कल्याणकारी भावना को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को राज्य का मुख्य कर्तव्य बताया है।
”पिताजी कर्मचारी थे, मैं संघर्ष और त्याग को करीब से समझता हूँ”
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए बेहद भावुक और संवेदनशील बात साझा की। उन्होंने कहा:
”मेरे पिताजी स्वयं एक साधारण सरकारी कर्मचारी थे। मैंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों से ही एक कर्मचारी के संघर्षों, उनकी सीमित आय में जिम्मेदारियों और परिवार के उज्ज्वल भविष्य के लिए किए जाने वाले त्याग को बहुत करीब से देखा है। इसलिए, मैं यह भली-भांति समझता हूँ कि जीवनभर की सेवा के बाद, सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के दौर में सम्मान, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा ही किसी कर्मचारी की सबसे बड़ी पूँजी होती है। इसी मानवीय सोच और कर्तव्य बोध के साथ हमारी सरकार ने सत्ता संभालते ही ओपीएस को बहाल किया था।”
कर्मचारियों के हितों के साथ नहीं होगा कोई समझौता
मुख्यमंत्री ने भाजपा की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र और राज्य की भाजपा लीडरशिप कर्मचारियों के इस सुरक्षित अधिकार को छीनकर उन्हें नए प्रयोगों (यूपीएस) में उलझाना चाहती है। उन्होंने हिमाचल के समस्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सुक्खू सरकार कर्मचारियों के वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है और उनके अधिकारों पर किसी भी तरह का आंच नहीं आने देगी।
चुनावी दहलीज पर फिर सबसे बड़ा मुद्दा बना ओपीएस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने सत्ता में आते ही अपने सबसे बड़े वादे को पूरा करते हुए कैबिनेट की पहली ही बैठक में ओपीएस बहाल कर देश के सामने एक मिसाल पेश की थी। अब आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच, इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री का यह आक्रामक रुख साफ संकेत दे रहा है कि आगामी चुनाव भी कर्मचारियों के हक और सामाजिक सुरक्षा के इर्द-गिर्द ही लड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री के इस तीखे बयान के बाद प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है और विपक्ष बैकफुट पर नजर आ रहा है।
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