किन्नौर और लाहौल-स्पीति में सड़क निर्माण, जल संकट और शिक्षा समस्याओं को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर

किन्नौर व लाहौल-स्पीति: विकास की राह में रोड़े और जनता की बढ़ती मुश्किलें

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​जिला रिपोर्टर: राजेंद्र नेगी (किन्नौर) | डोलमा (लाहौल-स्पीति)
​किन्नौर के रिकांगपिओ में लोक निर्माण विभाग द्वारा स्वीकृत सड़क निर्माण कार्य में हुई देरी के चलते स्थानीय ग्रामीणों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग का कहना है कि मशीनों की उपलब्धता में तकनीकी देरी हुई है, जबकि ग्रामीण इसे प्रशासनिक लापरवाही बता रहे हैं। आगामी मानसून के दृष्टिगत, सड़कों पर सुरक्षा दीवारें न होना भी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।


​किन्नौर के सुदूरवर्ती गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को जिला मुख्यालय या रामपुर की ओर रुख करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस सेवा का समय पर न पहुंचना भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। प्रशासन ने नए स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता का कहना है कि उन्हें केवल कागजी आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर डॉक्टर चाहिए।


​लाहौल-स्पीति में पर्यटन के बढ़ते दबाव के कारण काजा और आसपास के गांवों में पेयजल आपूर्ति का संकट गहरा गया है। जल शक्ति विभाग के अनुसार, जल स्रोतों में डिस्चार्ज कम होने और पर्यटकों की अतिरिक्त खपत से यह स्थिति बनी है। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से पर्यटकों के लिए पानी का अलग कोटा निर्धारित करने और ग्रामीणों के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।


​किन्नौर में सेब की फसल के लिए बागवानों को कीटनाशकों और खाद की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बागवानी विभाग का दावा है कि डिपुओं पर पर्याप्त स्टॉक भेजा जा चुका है, लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों तक इसकी ढुलाई समय पर नहीं हो पा रही है। किसान अब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं ताकि फसल की गुणवत्ता प्रभावित न हो।


​लाहौल-स्पीति में शिक्षा विभाग के तहत विभिन्न स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया जारी है लेकिन तैनाती न होने से शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों ने सरकार से आग्रह किया है कि जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष स्थानांतरण नीति अपनाकर रिक्त पद तुरंत भरे जाएं।


​लाहौल घाटी में पारंपरिक सिंचाई प्रणाली यानी ‘कुल’ (Irrigation Channels) रखरखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे किसानों को फसल की सिंचाई के लिए जूझना पड़ रहा है। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने मरम्मत के लिए बजट मिलने की बात कही है, लेकिन किसान अब इस देरी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
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