"चंबा में बढ़ा जनाक्रोश"

चंबा जिले की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल: विशेष रिपोर्ट

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​वरिष्ठ पत्रकार: भेषज
​चंबा: चंबा जिले के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों से लेकर शहरी ब्लॉकों तक, अव्यवस्था और प्रशासनिक अनदेखी के कारण जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर है। पांगी, भरमौर, चुराह, भटियात और डलहौजी सहित सभी ब्लॉकों की जनता ने अब नेताओं की नाकामियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


​भरमौर (आदिवासी क्षेत्र): भरमौर और होली क्षेत्र के ग्रामीणों ने विधायक को अल्टीमेटम दिया है कि यदि मणिमहेश मार्ग की खस्ताहाली नहीं सुधरी, तो वे आंदोलन करेंगे। स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटके हैं और कोई सुनने वाला नहीं है।
​पांगी (आदिवासी क्षेत्र): पांगी घाटी के हर पंचायत प्रधान ने प्रशासन को चेताया है कि सर्दियों की तैयारी और राशन की कमी पर यदि राजनीति बंद नहीं हुई, तो वे बड़े प्रदर्शन करेंगे। ट्राइबल फंड के नाम पर हो रही बंदरबांट से लोग बेहद आक्रोशित हैं।


​चुराह: चुराह ब्लॉक के तीसा और भंजराडू में सड़कों की बदहाली ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। जनता का आरोप है कि राजनीतिक रसूख वाले ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए घटिया सामग्री इस्तेमाल हो रही है।
​भटियात: भटियात क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल योजनाओं का बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों का बजट नेता और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से गायब हो रहा है।
​डलहौजी: डलहौजी ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली के कारण स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। नेता केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे कर रहे हैं, जबकि बुनियादी सुविधाएं शून्य हैं।


​चंबा (सदर): जिला मुख्यालय के वार्डों में गंदगी और पानी की किल्लत पर लोग नगर परिषद के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं। प्रशासन का कोई अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में गंभीर नहीं है।
​सलूणी: सलूणी ब्लॉक के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा न होने से कई लोगों की जान जोखिम में है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद नेता क्षेत्र का रुख करना भूल गए हैं।
​किहार: यहां के किसानों ने खाद और बीज की कालाबाजारी के लिए स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।


​मैहला: मैहला ब्लॉक में सड़कों की मरम्मती के नाम पर बड़े घोटाले की चर्चा है। जनता अब सड़कों पर उतरकर जवाब मांग रही है।
​होल (भरमौर): यहां बिजली के लंबे कटों ने लोगों का काम धंधा चौपट कर दिया है। विभाग और राजनीतिक नेताओं के बीच की सांठगांठ से जनता परेशान है।
​कालीराडी (पांगी): पांगी के इस हिस्से में मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही जनता का कहना है कि सरकार की ‘ट्राइबल एरिया’ के प्रति नीतियां केवल कागजी हैं।
​सुंदला (भटियात): क्षेत्र की जनता ने राजनीतिक अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि बुनियादी ढांचा नहीं सुधरा, तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे।


​बकलोह: डलहौजी ब्लॉक के इस हिस्से में पानी की समस्या विकराल हो चुकी है, जिस पर प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
​साहो: साहो क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। लोगों का कहना है कि नेता सिर्फ उद्घाटन के लिए आते हैं।
​खैरी: यहां सड़कों के नाम पर सिर्फ धूल और गड्ढे हैं। स्थानीय जनता ने साफ कहा है कि अब वे आश्वासन नहीं, काम चाहते हैं।
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