"हिमाचल की जमीनी हकीकत"

हिमाचल संडे विशेष: प्रशासनिक विफलताओं पर पंजाब दस्तक की रिपोर्ट

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​ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा, हेड ऑफिस की कलम से
​🚨 प्रदेश की ज्वलंत स्थिति और प्रशासनिक विफलताएं
​आज पूरा हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ा है। सचिवालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक फाइलों का अंबार है, लेकिन समाधान शून्य।
​सड़कों का जाल या मौत का जाल: मानसून की दस्तक के साथ ही पीडब्ल्यूडी की पोल खुल गई है। शिमला, सोलन और बिलासपुर के मुख्य राजमार्गों पर पैचवर्क केवल कागजों में हुआ है।
​शिक्षा और स्वास्थ्य का पतन: कांगड़ा और ऊना के सरकारी स्कूलों व अस्पतालों में रिक्त पदों पर सरकार की चुप्पी, युवाओं और मरीजों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।


​महंगाई और भ्रष्टाचार: हमीरपुर और मंडी की मंडियों में बिचौलियों का राज है, वहीं चंबा के दुर्गम इलाकों में राशन की आपूर्ति भगवान भरोसे है।
​हमीरपुर: सुजानपुर और भोरंज में पेयजल संकट गहरा गया है और जल शक्ति विभाग के अधिकारी केवल आश्वासनों में व्यस्त हैं। वार्ड स्तर पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। बड़सर में मनरेगा कार्यों में धांधली की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। नादौन में बरसात से पहले नालियों की सफाई न होने से जलभराव का खतरा है। लंबलू में स्वास्थ्य उप-केंद्र पर ताले लटके हैं।


​धर्मशाला व कांगड़ा: स्मार्ट सिटी धर्मशाला में निर्माण कार्यों की धीमी चाल से व्यापारी बेहाल हैं। नगरोटा और पालमपुर में सड़कें खस्ताहाल हैं। देहरा में जल निकासी की व्यवस्था न होने से लोगों में डर है। शाहपुर के स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। नूरपुर में अवैध खनन ने नदी तटों को छलनी कर दिया है। इंदौरा में सिंचाई परियोजनाएं खटाई में हैं।


​मंडी: सुंदरनगर और सरकाघाट में अघोषित बिजली कटौती आम हो गई है। उद्योगों पर अवैध खनन माफिया का कब्जा है। जोगिंद्रनगर में पर्यटन सीजन में बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। करसोग में सड़क बहाली के कार्य केवल नाम के हैं। धर्मपुर में पेयजल की भारी किल्लत है। बल्ह में ड्रेनेज व्यवस्था ध्वस्त होने से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं।


​ऊना: हरोली और अंब में औद्योगिक प्रदूषण के कारण उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है। बंगाणा में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से मरीज रेफरल का दंश झेल रहे हैं। गगरेट में सरकारी राशन की दुकानों पर घटतौली की शिकायतें आम हैं। ऊना शहर में अतिक्रमण से ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। संतोषगढ़ में सरकारी स्कूल के भवन जर्जर अवस्था में हैं।


​बिलासपुर: घुमारवीं और झंडूता में एंबुलेंस की भारी कमी है। नयनादेवी में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की किल्लत है। स्वारघाट में राजमार्गों पर सुरक्षा इंतजाम नदारद हैं। बरमाणा में प्रदूषण से स्थानीय लोग बीमारियों की चपेट में हैं। जुखाला में जल शक्ति विभाग की पाइपें टूटी पड़ी हैं, जिससे हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।


​चंबा व पांगी: भरमौर और पांगी के दुर्गम क्षेत्रों में राशन की कालाबाजारी जारी है। तीसा में संपर्क मार्गों के सुधारीकरण के लिए मशीनरी कागजों में काम कर रही है। डलहौजी में पर्यटन सीजन में अवैध होटल निर्माण धड़ल्ले से जारी है। चुराह में बिजली के खंभे गिरने की कगार पर हैं। सलूणी में मोबाइल नेटवर्क न होने से छात्र पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं।


​सोलन व शिमला: बद्दी और कसौली के औद्योगिक क्षेत्र में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। राजधानी में स्मार्ट सिटी का बजट कहां खर्च हुआ, यह बड़ा सवाल है। ठियोग और चौपाल में बागवानों को खाद-बीज की किल्लत है। रोहडू में सेब सीजन से पहले सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। नालागढ़ में अवैध कब्जों से मुख्य बाजार जाम रहता है। रामपुर में अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का टोटा है।


​कुल्लू, सिरमौर, लाहौल-स्पीति व किन्नौर: पर्यटकों से मनमानी वसूली और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण अभाव है। पांवटा साहिब में अवैध खनन ने नदी तटों को तबाह कर दिया है। नाहन में पेयजल संकट के लिए जिम्मेदार विभाग मौन है। मनाली में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था ध्वस्त है। रिकांगपिओ में सीमावर्ती सड़कों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है। केलांग में राशन आपूर्ति के लिए हेलीकॉप्टर पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है।


​📢 जन-आवाज और जनता की मांग
​क्या सरकार केवल चुनावी रैलियों तक सीमित है? पंजाब दस्तक हर उस ब्लॉक की आवाज उठाएगा जिसे दबाया गया है। हमारी धारदार कलम हर उस अधिकारी की जवाबदेही तय करेगी जो जनता के टैक्स के पैसे पर पल रहा है।
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