शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कमला नेहरू अस्पताल को आईजीएमसी शिफ्ट करने के खिलाफ दायर याचिका में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है। फिलहाल इसे शिफ्ट करने पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किए गए हैं और अगली सुनवाई 28 मई को निर्धारित की गई है। अखिल भारतीय जनवादी महिला संगठन की सचिव फालमा चौहान की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले को लेकर सुनवाई की। सरकार ने हाल ही में कमला नेहरू अस्पताल की गायनी ओपीडी और कुछ अन्य सेवाओं को आईजीएमसी शिफ्ट करने का फैसला लिया है , जिसके खिलाफ याचिका दायर की गई है। सरकार का तर्क है कि आईजीएमसी में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं और मरीजों को उन्नत इलाज मिल सकेगा। याचिका में कहा गया है कि कमला नेहरू हॉस्पिटल 1937 से काम कर रहा है और अब इसमें तीन बिल्डिंग हैं, दो सात मंजिला बिल्डिंग और एक और बिल्डिंग जो पूरी तरह से मदर चाइल्ड केयर और गायनेकोलॉजी और ऑब्टेट्रिक्स डिपार्टमेंट के लिए इस्तेमाल होती है।
याचिका में कहा गया है कि 17 अप्रैल, 2026 को प्रिंसीपल आईजीएमसी द्वारा प्रोफेसर और प्रमुख ओबीजी विभाग केएनएच को जारी पत्र के अनुसार आठ अप्रैल, 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जारी निर्देशों के अनुपालन में और उच्च अधिकारियों की इच्छानुसार केएनएच शिमला से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित किए पूर्ण गाइनी ओपीडी ओबीजी विभाग जनशक्ति (मशीनरी और उपकरणों) सहित से पर्याप्त जनशक्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। आरोप है कि यह शिफ्टिंग विश्व स्वास्थ्य संगठन के मेडिकल मानकों के विपरीत है, क्योंकि एक नवजात शिशु को ऐसे अस्पताल में रखना जहां अलग-अलग बीमारियों से पीडि़त अन्य मरीजों का इलाज होता है, उस स्थिति में नवजात शिशु संक्रमित हो सकता ह याचिका में मांग की गई है कि प्रतिवादियों को कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी को स्थानांतरित न किया जाए।
