तमिलनाडु का सस्पेंस खत्म; विजय ने सौंपा 121 विधायकों का समर्थन पत्र, आज शपथ संभव

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दिल्ली:तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर चार दिन से जारी राजनीतिक सस्पेंस खत्म हो गया है। टीवीके चीफ और एक्टर विजय मुख्यमंत्री बनेंगे। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने की मंजूरी दे दी है। विजय शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। विजय ने शुक्रवार को लोकभवन में लगातार तीसरे दिन राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने राज्यपाल को 121 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा। इस पत्र में विजय की पार्टी के 107 विधायक, कांग्रेस के पांच, सीपीआई एम के दो, सीपीआई के दो, वीसीके के दो, आईयूएमएल के दो और एएमएम के एक विधायक समर्थन की बात कही गई थी। इससे पहले विजय ने छह और सात मई को भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था, लेकिन राज्यपाल ने कहा कि 118 विधायकों का समर्थन दिखाए बिना वे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं कर सकते। इससे पहले बहुमत के लिए जूझ रहे टीवीके को शुक्रवार को उस समय सुकून मिला, जब दोनों वामदलों ने उसे बाहर से समर्थन देने की घोषणा की। वामपंथी दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और माकपा ने यह समर्थन बिना किसी शर्त के नहीं दिया है। वामपंथी दलों ने टीवीके को समर्थन देने के पीछे की बड़ी वजह सार्वजनिक कर दी है। साथ ही विजय की पार्टी को सख्त मैसेज भी दिया है। सीपीआई और सीपीआई (एम) ने साफ कहा है कि उन्होंने टीवीके को समर्थन भाजपा को सत्ता समीकरण से दूर रखने और एआईएडीएमके को समर्थन देने के डीएमके के प्रस्ताव का विरोध करने के लिए दिया।सीपीआई नेता एमए बेबी ने कहा कि डीएमके चाहती थी कि वाम दल एआईएडीएमके को समर्थन दें और वे खुद बाहर से समर्थन देकर सरकार बनवाएं। यह सीपीएम और सीपीआई के लिए स्वीकार्य नहीं था। इसलिए हमने डीएमके से अलग रास्ता चुना और उनके बहुमत जुटाने से पहले टीवीके को समर्थन दे दिय। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाम दलों का वैचारिक और राजनीतिक रिश्ता डीएमके के साथ जारी रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि टीवीके को केवल बाहरी समर्थन दिया जाएगा और सरकार में किसी मंत्री पद या कैबिनेट हिस्सेदारी की मांग नहीं की जाएगी। इसके अलावा सीपीआईएम नेता वीरपांडियन का बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाम दलों ने टीवीके को भाजपा को तमिलनाडु में रोकने के उद्देश्य से समर्थन दिया है, न कि किसी राजनीतिक समझौते के तहत। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विजय भविष्य में भाजपा के करीब जाते हैं या उसके साथ गठबंधन करते हैं, तो सीपीआई उनका खुलकर विरोध करेगी। वीरपांडियन के इस बयान को तमिलनाडु की राजनीति में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को लेकर वाम दलों की चिंता के तौर पर देखा जा रहा है।

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