निजी अस्पतालों तक हिमकेयर जांच की आंच, विजिलेंस ब्यूरो ने स्वास्थ्य बीमा सोसायटी से कब्जे में लिया रिकार्ड

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शिमला, सुरेंद्र राणा:पूर्व जयराम सरकार द्वारा शुरू की गई हिमकेयर स्वास्थ्य बीमा योजना में अब विजिलेंस ब्यूरो की जांच की आंच कई निजी अस्पतालों तक आने वाली है। विजिलेंस ब्यूरो ने स्वास्थ्य बीमा सोसायटी से सारा रिकार्ड ले लिया है। इसके बाद सोसायटी ने जांच एजेंसी को ऑनलाइन डाटा का एक्सैस भी दे दिया है। इसलिए अब जांच एजेंसी निजी अस्पतालों में संभावित गड़बड़ी की तलाश कर रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमकेयर में करीब 110 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में आईजीएमसी और टांडा का ही डाटा लिया था, लेकिन अब इसका विस्तार हो रहा है। इस जांच में मिलने वाले तथ्यों के आधार पर ही अब एफआईआर दर्ज होगी। जांच की शुरुआत में स्वास्थ्य बीमा योजना के कर्मचारियों को पुलिस मुख्यालय ही बुलाया था। इसके बाद आईजीएमसी और टांडा से रिकार्ड लिया गया है।विजिलेंस को यह जांच मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दी थी। सीएम ने विधानसभा में कहा था कि उन्होंने आईजीएमसी और टांडा का इंटरनल ऑडिट करवाया था। इन दोनों अस्पतालों में ही करीब 110 करोड़ का घपला होने का अंदेशा है। इसके बाद ही जांच विजिलेंस को दी गई थी। विजिलेंस ने इसके बाद इस योजना से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की है। सीएम ने पुरुषों की बच्चेदानी करने का रिकार्ड मिलने के बात कही थी, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दावा किया था कि ये बात सही नहीं है। महिलाओं की बच्चेदारी और पुरुषों के प्रोस्टेट का पैकेज हिमकेयर में एक ही है, इसलिए ये प्रचार किया जा रहा है।भुगतान की राशि 450 करोड़ से ज्यादा लंबितपूर्व भाजपा सरकार ने पहली जनवरी, 2019 को हिमकेयर योजना शुरू की थी, जिसमें राज्य के लोगों को सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपए तक का वार्षिक कैशलेस इलाज करवाने की सुविधा दी गई थी। एक कार्ड पर परिवार के अधिकतम पांच सदस्यों को लाभ देने का प्रविधान था। योजना उन परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई थी, जो केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं आते थे। बीपीएल, मनरेगा मजदूर, और एकल महिलाओं के लिए यह मुफ्त है। अन्य के लिए 1000 रुपए का वार्षिक प्रीमियम है। योजना के दायरे में पांच लाख से अधिक परिवार शामिल किए जा चुके हैं, लेकिन लंबे समय से चल रही विवाद के कारण इस योजना में लाभार्थियों के भुगतान की लंबित राशि 450 करोड़ से अधिक हो गई है।

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