शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर की बकाया पेंशन एवं एरियर का भुगतान एक माह के भीतर करने का आदेश दिया हैं। राज्य सरकार ने विधेयक पारित कर अयोग्य घोषित विधायकों की पेंशन बंद करने का प्रावधान किया है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि विधेयक की प्रभावशीलता को पहले से लागू नहीं किया जा सकता है। यह प्रावधान भविष्य के लिए लागू होगा। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले का निपटारा करते हुए विधानसभा सचिव को आदेश दिए हैं कि यदि एक महीने में भुगतान नहीं किया तो बकाया राशि पर 6 फीसदी वार्षिक दर से ब्याज देना होगा। भविष्य की पेंशन समय पर जारी करें। राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर ने पेंशन रोकने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दरअसल, राज्य सरकार ने विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक 2024 के माध्यम से दलबदल (10वीं अनुसूची) के तहत अयोग्य घोषित सदस्यों की पेंशन रोकने का प्रावधान किया था। विधानसभा सचिव की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि सरकार ने पुराना विवादित विधेयक वापस ले लिया है। इसकी जगह नया विधेयक पारित किया है, जिसके तहत केवल 14वीं विधानसभा या उसके बाद चुने सदस्यों पर ही नियम लागू होगा। सरकार ने विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा है, जिस पर अभी सहमति मिलना बाकी है। चूंकि राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर 12वीं और 13वीं विधानसभा के सदस्य रहे हैं, इसलिए नया कानून उन पर लागू नहीं होता।
साल 2024 में कांग्रेस के छह विधायकों राजेंद्र राणा, रवि ठाकुर, सुधीर शर्मा, इंद्रदत्त लखनपाल, चैतन्य शर्मा और देवेंद्र कुमार भुट्टो पर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कांग्रेस विधायक रहते राज्यसभा में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी और भाजपा का दामन थाम लिया था। इनमें से सुधीर और लखनपाल उपचुनाव में फिर से भाजपा विधायक चुने गए। उन्हें वेतन मिलता है। चैतन्य और भुट्टो पहली बार चुने गए तो उन्हें पेंशन बाद में नहीं लगेगी। राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर की पेंशन बंद हो गई थी। वे पिछली विधानसभाओं में भी विधायक रहे हैं।
