हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र संपन्न, 16 बैठकों में कई मुद्दों पर हुई चर्चा, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच देखने को मिली तीखी नोंकझोंक।

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शिमला, सुरेंद्र राणा: दो चरणों में में चला हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र आज खट्टे मीठे अनुभवों के साथ समाप्त हो गया। सत्र में कुल 16 बैठकें आयोजित की गई। पहले चरण के सत्र में RDG छाया राहत। जबकि दुसरे चरण में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 मार्च को बजट पेश किया, जिसमें नेताओं और अफसरों के वेतन को छः माह तक के लिए 50 से तीन फ़ीसदी कम करने का बड़ा निर्णय लिया। मुख्यमंत्री द्वारा सबसे लंबा बजट पढ़ा गया। सत्र में पंचायती राज चुनाव को लेकर खूब हंगामा हुआ।विपक्ष के विरोध के बावजूद डीज़ल और पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपए तक की बढ़ोतरी का बिल, दलबदल कानून के तहत लाए गए बिलों को पेश और पारित किया गया। इसके अलावा एंट्री टैक्स बढ़ौतरी पर भी सदन खुब तपा।

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानीयां ने बताया कि 16 दिन तक चले बजट सत्र की कार्यवाही 90 घंटे तक चली- जिसकी उत्पादकता 103% रही।102 के तहत RDG पर सरकारी संकल्प लाया गया। बजट सत्र के दौरान में 471 तारांकित और 146 अतारांकित सवाल सदस्यों द्वारा पूछे गए। 9 सरकारी विधायकों को सदन में पुनः स्थापित किया गया। नियम 61 के तहत 4 , नियम 62 के तहत 2, नियम 67 के तहत 1 नियम 101 के तहत 4, और नियम 130 के तहत 1 प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त शून्य काल 94 विषय उठाए गए।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि बजट सत्र में RDG के संकल्प को लाया गया। हिमाचल में RDG बन्द होने के बाद प्रदेश में बजट का आकार कुछ कम करना पड़ा बाबजूद इसके प्रदेश के विकास को रुकने नहीं दिया जाएगा। प्रदेश में आर्थिक संकट जैसे हालात नहीं है। राज्य आत्म निर्भरता की तरफ बढ़ रहा है, सीमित संसाधनों के बाबजूद प्रदेश के विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने पेट्रोल डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मीडिया में चलाई गई खबरों को भ्रामक करार दिया।

विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि बजट सत्र को दो चरणों में करवाकर सरकार ने अपनी सुविधा का पूरा ध्यान रखा। उन्होंने कहा कि हिमाचल में आर्थिक संकट के लिए दोष कोई एक सरकार का नहीं है, बल्कि पिछली सरकारों का है लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह को सामने जय राम ठाकुर दिखता है तो सारा दोष उन पर मढ़ा जाता है। मुख्यमंत्री बार बार प्रदेश की संपदा को लुटाने का आरोप लगाते है -गलत है, पिछली भाजपा सरकार ने लोक हित की योजनाएं चलाई, लुटाने जैसे शब्द विधानसभा की कार्यवाही से हटाएं जाएं। सुखविंदर सरकार ने अब तक का सबसे ज्यादा 16 फीसदी लोन लिया है। लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है, सरकार विपक्ष की आवाज को नहीं दबा सकती है। व्यवस्था परिवर्तन के दौर में व्यवस्था तार तार हो रही है। लगे हाथों विपक्ष के नेता ने IAS अफसरों की लड़ाई को रोकने के लिए भी मुख्यमंत्री को सलाह दी।

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