नई दिल्लीहोर्मुज स्ट्रेट के पास कई दिनों तक फंसे रहने के बाद एलपीजी से लदा भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ सोमवार को दोपहर बाद गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया। 46,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी लेकर आए इस जहाज के कारण पश्चिम एशिया संकट के कारण बाधित हुई घरेलू आपूर्ति को जरूरी राहत मिलेगी। इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट को पार कर आए दो अन्य भारतीय जहाज भी मंगलवार को गुजरात तट पर पहुंचने वाले हैं। इनमें एक एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ है, जो कि करीब 46 हजार टन एलपीजी लेकर आ रहा है। इसके अलावा दूसरा जहाज ‘जग लाडकी’ करीब 81 हजार टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है। उधर, ईरान ने भारत से फरवरी में जब्त किए गए अपने तीन टैंकर छोडऩे की मांग की है। होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठा है। ईरान ने भारत से कुछ दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की सप्लाई की भी मांग की है। इस मुद्दे पर ईरान के राजदूत ने सोमवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर चर्चा की। बता दें कि भारत ने फरवरी में एस्फाल्ट स्टार, अल जाफ्जिया और स्टेलर रूबी नाम के तीन टैंकर जब्त किए थे। आरोप है कि इन जहाजों ने अपनी पहचान छिपाई और समुद्र में अवैध शिप-टू-शिप ट्रांसफर में हिस्सा लिया था। फिलहाल ये टैंकर मुंबई के पास लंगर डाले हुए हैं।इसी बीच, खर्ग द्वीप के बाद अमरीका ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर बड़ा हमला किया है। अमरीका के लड़ाकू विमानों ने ट्रेड जोन में सैन्य छावनियों को निशाना बनाया है। इससे बड़े नुकसान की आशंका है। बता दें कि इससे पहले अमरीका ने खर्ग द्वीप पर हमला किया था, जो कि ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। बता दें कि ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए बहुत मायने रखता है। पश्चिमी एशिया और यूरोप से व्यापार के लिए भारत इस पोर्ट का सहारा लेता है। उधर, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने से अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर चौतरफा दबाव पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस मुश्किल समय में भी ट्रंप को अपने सहयोगी नाटो देशों की मदद नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि ट्रंप ने सहयोगी देशों को चेतावनी दी है कि नाटो समूह का भविष्य अच्छा नहीं है। एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने नाटो के सहयोगी देशों को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्टे्रट से फायदा लेने वाले देश अगर इसे खोलने के लिए अपने युद्धपोत नहीं भेजते हैं, तो ठीक नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई कुछ नहीं करता या मदद नहीं करता है, तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा।
