एचआरटीसी पेंशनरों की समस्याओं पर नहीं हो रही सुनवाई, 17 मार्च को शिमला में होगी अगली रणनीति बैठक

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शिमला, सुरेंद्र राणा:एचआरटीसी पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति (हि.प्र.) ने आरोप लगाया है कि पथ परिवहन निगम के पेंशनरों की समस्याओं की ओर न तो निगम प्रबंधन ध्यान दे रहा है और न ही प्रदेश सरकार। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से पेंशनर सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।समिति के अनुसार निगम के पेंशनरों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही है। अन्य विभागों के पेंशनरों को जहां 50 हजार रुपये एरियर की किस्त, 70 वर्ष से अधिक आयु वालों को पूरा एरियर और 3 प्रतिशत डीए की अतिरिक्त किस्त जैसे लाभ मिल चुके हैं, वहीं निगम के पेंशनर इन सुविधाओं से वंचित हैं।संघर्ष समिति ने बताया कि चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए मुख्यमंत्री द्वारा पहले 9 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी, जबकि अगस्त 2025 में 3 करोड़ रुपये देने का भी आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद अभी तक इस मद में कोई बजट जारी नहीं किया गया है। सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में चिकित्सा बिलों का ब्यौरा भेजने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन भुगतान अब तक नहीं हो पाया है।समिति ने यह भी बताया कि 8 जनवरी को निगम प्रबंधन के साथ हुई बैठक में प्रबंध निदेशक ने कई मांगों पर 31 मार्च 2026 तक सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इनमें 1 जनवरी 2016 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों की पेंशन फिक्सेशन, 6 माह के चिकित्सा बिलों का भुगतान, 3 प्रतिशत डीए की अतिरिक्त किस्त तथा 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को पूरा एरियर देने जैसी मांगें शामिल थीं। लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।संघर्ष समिति के सचिव राजेन्द्र ठाकुर, मीडिया प्रभारी बृज लाल ठाकुर, पेंशनर कल्याण संगठन के प्रधान देवराज ठाकुर, सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण मंच के कार्यकारी उपाध्यक्ष अजमेर ठाकुर और महासचिव रूप चंद शर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि सरकार और निगम प्रबंधन द्वारा मांगों पर प्रभावी अमल नहीं होने के कारण पेंशनरों को बार-बार आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।उन्होंने बताया कि संयुक्त संघर्ष समिति की अगली बैठक 17 मार्च 2026 को शिमला में बुलाई गई है, जिसमें आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

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