एम्स बिलासपुर: 350 करोड़ से बनेगा 300 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक ट्रॉमा ब्लॉक, मिली सैद्धांतिक मंजूरी

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बिलासपुर, काजल: एम्स बिलासपुर में ट्राॅमा सेंटर, ट्राॅमा आईसीयू और आपातकालीन ब्लॉक बनाने का रास्ता साफ हो गया। वित्त समिति से इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से 300 से ज्यादा बिस्तरों के सेंटर में गंभीर मरीजों का इलाज होगा। सड़क हादसों में घायल और आग से झुलसे मरीजों को प्रदेश में ही अत्याधुनिक इलाज मिल सकेगा। ट्राॅमा सेंटर पिछले करीब दो वर्ष से पाइपलाइन में था। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 2025 में एम्स बिलासपुर के दौरे के दौरान इसकी समीक्षा भी की थी। अब सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। मंजूरी के बाद अब अंतिम वित्तीय स्वीकृति और बजट जारी होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रस्तावित ट्राॅमा ब्लॉक आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और उन्नत सुविधाओं से लैस होगा।इसमें ट्रामा आईसीयू, आपातकालीन वार्ड, बर्न यूनिट और अन्य विशेष उपचार सुविधाएं विकसित की जाएंगी। एम्स बिलासपुर की आपातकालीन ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि यहां केवल लगभग 30 मरीजों के लिए ही व्यवस्था है। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और एडवांस ट्राॅमा सेंटर की आवश्यकता पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। प्रदेश के हमीरपुर और मंडी मेडिकल कॉलेजों से हर दिन करीब 30 से अधिक मरीज रेफर होकर सीधे एम्स बिलासपुर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा टीएमसी से भी मरीज इलाज के लिए यहां भेजे जा रहे हैं। इनमें पेट दर्द, जहर खाने (प्वाइजनिंग), सांप काटने जैसी सामान्य शिकायत वाले मरीज भी शामिल हैं। नियमों के तहत जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में मरीजों का प्राथमिक उपचार किया जाना चाहिए और केवल गंभीर स्थिति में ही उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थान भेजा जाना चाहिए, लेकिन एम्स शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेजों से मरीजों का रेफरल आम हो गया है। इस कारण गंभीर मरीजों को आपातकालीन सेवाओं में समय पर उपचार मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल में अलग से बर्न यूनिट न होने के कारण गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज में भी कठिनाई आती है। कई मामलों में मरीजों को अन्य संस्थानों में भेजना पड़ता है, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं। प्रस्तावित परियोजना में बर्न यूनिट शामिल होने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। परियोजना के तहत हेलीपैड की सुविधा भी विकसित करने की योजना है, ताकि, दुर्गम क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर तेजी से अस्पताल पहुंचाया जा सके। इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूती मिलेगी।

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