मंडी काजल: अंतराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन चौहटा में देवी-देवताओं ने विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। चौहटे री जातर में एक साथ 200 से अधिक देवी-देवता विराजे। सात दिनों के देव समागम के बाद अंतिम दिन भावुक विदाई दी गई। देवी देवताओं के शहर से जाने के बाद शहर सूना पड़ गया। अब छेाटी काशी मंडी में फिर से एक साल का इंतजार शुरू हो गया। अगले वर्ष फिर यह देव समागम सजेगा और देवी देवता छोटी काशी पंहुचेंगे। चौहटे री जातर के बाद देवी-देवता अपने-अपने धामों में लौट गए हैं। शिवरात्रि के अंतिम दिन राजाओं के समय से चली आ रही पंरपरा का निर्वहन करते देवता चौहटा में बैठे। राजाओं के शासन काल में चौहटा में ही देव दरबार सजता था, लेकिन समय के साथ-साथ कई बदलाव हुए और पड्डल में देवी-देवताओं को बैठाना शुरू किया गया।
लेकिन परंपरा निभाने आज भी देवता चौहटा आते हैं और यहां बैठकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। स्थानीय मान्यता है कि जो श्रद्धालु सप्ताह भर किसी कारणवश देव दर्शन नहीं कर पाते, वे इस दिन एक साथ सभी देवी-देवताओं के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यही कारण है कि समापन दिवस पर यहां सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। आठ दिनों से टारना माता मंदिर में विराजमान देव कमरूनाग भी इस विशेष अवसर पर बाजार पहुंचकर सेरी की सीढिय़ों पर विराजते हैं। देव सेरी चाणनी परिसर में विराजे और वहां से अपने भक्तों के घरों की ओर प्रस्थान की परंपरा निभाई गई। देव कमरूनाग के देवलुओं ने बताया कि वे सप्ताह भर की पैदल यात्रा के बाद पुन: अपने मूल स्थान की ओर लौटेंगे। उपायुक्त मंडी ने भी चौहटा पहुंचकर देवी-देवताओं के समक्ष शीश नवाया और जिले की सुख-समृद्धि की कामना की।
