शिमला,सुरेंद्र राणा:हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन भी RDG के मुद्दे पर चर्चा चल रही है। इस दौरान डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री सदन में संविधान की कॉपी लेकर पहुंचे और RDG को संविधान के अनुच्छेद 175 के तहत हिमाचल को दिया गया अधिकार करार दिया विपक्ष को निशाने पर लिया।डिप्टी CM ने भारत के संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ राज्यों को अधिकार दिए। RDG केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि हिमाचल और हिमाचलियत का प्रश्न है। जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” जैसे नारे लगाते थे, वही आज RDG का विरोध कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि इस पर्वतीय राज्य को केंद्र सहायता करेगा। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से जोड़ा गया। पिछले कुछ वर्षों से राज्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सवाल उठाया कि यदि राज्यों को सशक्त नहीं करना था तो उनका गठन ही क्यों किया गया। जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ हुआ, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्य को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। पहले जीएसटी कंपनसेशन बंद किया गया और अब RDG को भी समाप्त करने की बात हो रही है, जो हिमाचल के लिए गंभीर विषय है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 में से 12 राज्यों में RDG पर निर्भरता केवल 1 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे राज्यों को इसकी विशेष आवश्यकता नहीं है, लेकिन हिमाचल को इसकी जरूरत है। नागालैंड की RDG पर निर्भरता 17 प्रतिशत और हिमाचल की 13 प्रतिशत है, जबकि कर्नाटक की निर्भरता मात्र 1 प्रतिशत है।RDG बंद होने पर जयराम ठाकुर के चुनाव के लिए तैयार रहने के बयान दे रहे हैं जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
वहीं नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि RDG के मुद्दे पर सरकार अपना व्यू प्वाइंट नहीं बता रही है केवल राजनीतिक लाभ के लिए सरकार संकल्प लेकर आई है। अगर सुक्खू सरकार RDG को लेकर राजनीतिक लड़ाई ही लड़ना चाहती है तो विपक्ष भी इसके लिए भी तैयार है।RDG के मुद्दे को लेकर भाजपा अपने स्तर पर केंद्र सरकार के समक्ष मुद्दा उठा रही है। डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री अपनी भड़ास निकालने के लिए सदन में भाजपा को दोषी ठहरा रहे हैं। दिल्ली से मदद रुकवाने के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं अगर उनके पास तथ्य है तो सामने रखें यह प्रिविलेज का मामला भी बनता है। जहां तक चुनाव के लिए तैयार रहने की बात है तो हिमाचल में सरकार को साढ़े तीन साल का कार्यकाल हो गया है ऐसे में अब चुनावों की तैयारियां शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री चुनाव लड़ने के लिए विधानसभा क्षेत्र ढूंढ रहे हैं और अपनी पत्नी के विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ने की तैयारी में है लेकिन वहां उनकी पत्नी भी चुनाव लड़ने पर अड़ी हुई है। डिप्टी सीएम कह चुके हैं कि उनका अब चुनाव लड़ने का मन नहीं है जब चुनाव होंगे तो कई कांग्रेस विधायक चुनाव से भागते नजर आएंगे ऐसे सरकार ने कांग्रेस विधायकों के हाल कर दिए हैं।
