शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन भी आज राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) पर चर्चा जारी रहेगी। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस संवेदनशील विषय पर तीखी बहस होने के आसार हैं।कांग्रेस सरकार 16वें वित्त आयोग द्वारा आरडीजी बंद करने की सिफारिश को प्रदेश के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे आर्थिक झटका करार दे रही है।जबकि भारतीय जनता पार्टी राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठा रही है। दरअसल, 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने की सिफारिश की है। यदि यह सिफारिश लागू होती है, तो राज्य को अगले पांच वर्षों में लगभग 40 हजार करोड़ से 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।हिमाचल के कुल बजट का करीब 13 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता है, ऐसे में इसके बंद होने से राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकार के पास नए कर लगाने के सीमित विकल्प बचे हैं, जिससे वित्तीय संकट की स्थिति और गहरा सकती है।इसी मुद्दे को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में एक संकल्प पेश किया है। इस संकल्प को सदन से पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि आरडीजी को बहाल करने की मांग की जा सके। इस पर आज विस्तृत चर्चा होगी और सत्ता व विपक्ष दोनों पक्ष अपने तर्क रखेंगे।
