सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ)शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में चर्चा के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने प्रदेश की आर्थिकी को सुधारने के लिए सरकार के समक्ष एक ठोस खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को कर्ज के जाल से निकालने के लिए सरकार को माइनिंग (खनन) और फिजूलखर्ची पर सख्त नीतियां बनानी होंगी।ठोस माइनिंग पॉलिसी से भरेगा खजानारणधीर शर्मा ने माइनिंग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज प्रदेश को एक ऐसी माइनिंग पॉलिसी की दरकार है जो पारदर्शी हो और राजस्व बढ़ाने वाली हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि:राजस्व की चोरी रोकें: वर्तमान में माइनिंग के क्षेत्र में जो अव्यवस्था है, उससे सरकार को मिलने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। अगर एक बेहतर और सख्त माइनिंग पॉलिसी बनाई जाए, तो सरकार का बजट स्वतः ही बढ़ जाएगा।करोड़ों का बजट: उन्होंने कहा कि माइनिंग से कानूनी रूप से करोड़ों रुपये जुटाए जा सकते हैं, जिससे प्रदेश की विकास योजनाओं को बिना कर्ज लिए पूरा किया जा सकता है।गाड़ियों के खर्च पर ‘शांता-धूमल’ मॉडल की याद दिलाईरणधीर शर्मा ने फिजूलखर्ची रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्रियों के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया:शांता कुमार जी का अनुशासन: उन्होंने याद दिलाया कि शांता कुमार जी के समय में सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए शनिवार और रविवार को गाड़ियाँ बंद रखने की परंपरा थी।धूमल साहब की नीति: पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने भी इसी अनुशासन को आगे बढ़ाते हुए सप्ताह के एक दिन गाड़ियों पर रोक लगाई थी, ताकि ईंधन और सरकारी पैसे की बचत हो सके।वर्तमान सरकार को नसीहत: उन्होंने मांग की कि वर्तमान सरकार भी ऐसी ‘मितव्ययिता’ अपनाए जिससे करोड़ों रुपये की सरकारी बर्बादी रुक सके।आत्मनिर्भर हिमाचल का लक्ष्यरणधीर शर्मा ने निष्कर्ष के तौर पर कहा कि हिमाचल के पास अपने संसाधन हैं। अगर सरकार सही माइनिंग पॉलिसी बनाए और सरकारी खर्चों में अनुशासन लाए, तो हमें दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
