शिमला | ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
हिमाचल प्रदेश सरकार के एक ताजा फैसले ने प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। 13 फरवरी को जारी अधिसूचना के बाद अब आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया तेज हो गई है, जिससे प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भारी आक्रोश है।
मुख्य समाचार:
31 मार्च तक का अल्टीमेटम: सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को 31 मार्च तक पदमुक्त कर दिया जाए। इस फैसले से स्वास्थ्य, बिजली और शिक्षा जैसे विभागों में काम कर रहे हजारों परिवार सड़क पर आ जाएंगे।
रिटायर्ड कर्मियों पर मेहरबानी: एक तरफ जहाँ ऊर्जावान युवाओं को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार सेवामुक्त (Retired) हो चुके चहेते अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा नियुक्तियां देकर उन पर मेहरबानी बरसा रही है।
दोहरी नीति पर सवाल: जनता पूछ रही है कि यह कैसी व्यवस्था है? युवाओं के हाथों से रोजगार छीनकर रिटायर्ड लोगों को दोबारा नौकरी देना क्या न्यायसंगत है? इस नीति से कई घरों के चूल्हे बुझने की कगार पर पहुँच गए हैं।
बजट सत्र में गूंजेगा मुद्दा: विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी है। कर्मचारी संगठनों ने भी इस ‘अन्याय’ के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
