पंजाब दस्तक महा-सौदा: भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक डील पर मुहर; भारतीय खेती के लिए खुले ‘खुशहाली’ के द्वार म
मुख्य संपादक बाल संगीता राणा की कलम से: भारत और अमेरिका के बीच 7 फरवरी 2026 को हुआ अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Agreement) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब वैश्विक व्यापार में अपनी शर्तों पर आगे बढ़ने में सक्षम है। यह समझौता न केवल व्यापारिक आंकड़ों को बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारत-अमेरिका संबंधों की नई बुनियाद भी रखेगा।उत्तर भारत के किसानों के लिए राहत की मुख्य बातें:डेयरी सेक्टर सुरक्षित: भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी दूध, घी और पनीर के लिए अपने बाजार नहीं खोले हैं। हमारे स्थानीय पशुपालकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कोई आंच न आए।बागवानी की रक्षा: हिमाचल और कश्मीर के बागवानों के लिए राहत की बात यह है कि सेब जैसे संवेदनशील उत्पादों पर भारत ने अपनी शर्तों को कड़ा रखा है। स्थानीय बागवानों के मुनाफे से कोई समझौता नहीं किया गया है।सस्ता पशु चारा (DDGS): अमेरिका से आने वाला मक्का आधारित उच्च प्रोटीन चारा पंजाब और हरियाणा के डेयरी फार्मर्स के लिए गेम-चेंजर होगा। यह चारा न केवल सस्ता पड़ेगा, बल्कि पशुओं के दुग्ध उत्पादन की क्षमता में भी वृद्धि करेगा।निर्यात में भारत की ‘बड़ी छलांग’ और रोजगार की संभावनाइस समझौते के तहत भारत ने अपने कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में अभूतपूर्व पहुंच हासिल की है:शुल्क मुक्त फल: भारत के आम, अमरूद, केला और अनार अब बिना किसी टैक्स के अमेरिकी बाजारों में पहुंचेंगे। इससे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात के साथ-साथ उत्तर भारत के फल उत्पादकों को सीधे डॉलर में भुगतान मिलेगा।मसालों का दबदबा: हल्दी, काली मिर्च और अदरक जैसे भारतीय मसालों को ‘जीरो ड्यूटी’ श्रेणी में रखने से भारतीय मसाला बोर्ड और छोटे किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका मिलेगा।पंजाब के औद्योगिक हब को संजीवनी: लुधियाना का टेक्सटाइल और जालंधर का लेदर उद्योग, जो लंबे समय से वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा था, अब अमेरिकी बाजार में जीरो ड्यूटी के लाभ के साथ चीनी उत्पादों को कड़ी टक्कर देगा। इससे पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।रणनीतिक व्यापारिक संतुलन और भविष्य की चुनौतियांसौदा हमेशा बराबरी का होता है, इसलिए भारत ने भी कुछ रणनीतिक रियायतें दी हैं:बादाम और अखरोट: अमेरिकी सूखे मेवों पर ड्यूटी कम करने से भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर और किफायती विकल्प मिलेंगे।गुणवत्ता मानक: भारतीय निर्यातकों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी ‘फाइटोसैनिटरी’ मानकों को पूरा करना होगा। हमें अपनी पैकिंग और ग्रेडिंग की तकनीक में सुधार करना होगा।तिलहन बाजार: अमेरिकी सोयाबीन तेल के सीमित आयात से स्थानीय तेल मिलों को अपनी गुणवत्ता और पैकेजिंग में सुधार करना होगा ताकि वे बाजार में टिक सकें।विशेष संदेश: भारत ने अपनी ‘जैविक सुरक्षा’ से कोई समझौता नहीं किया है। जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के प्रवेश पर पाबंदी जारी रखी गई है। हमारी मिट्टी और स्वदेशी बीज की शुद्धता को हर हाल में सुरक्षित रखा गया है।
