हिमाचल पंचायत चुनाव: हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची सरकार, विपक्ष ने बोला हमला; क्या टल जाएंगे चुनाव?

Spread the love

पंजाब दस्तक
​ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
​शिमला/दिल्ली: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर चल रहा कानूनी घमासान अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुँच गया है। प्रदेश सरकार ने हिमाचल हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है, जिसमें हाई कोर्ट ने सख्त आदेश देते हुए 30 अप्रैल 2026 तक चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने को कहा था। सरकार की इस विशेष अनुमति याचिका (SLP) के बाद अब चुनावों के समय पर होने को लेकर संशय गहरा गया है।
​सरकार की दलील: आपदा और प्रशासनिक चुनौतियां
​हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया है कि प्रदेश में वर्तमान परिस्थितियों और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते तत्काल चुनाव कराना संभव नहीं है। सरकार हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक की मांग कर रही है, जिसमें परिसीमन और आरक्षण के काम को फरवरी अंत तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई थी।
​विपक्ष का तीखा हमला: “जनता का सामना करने से डर रही सरकार”
​इस कानूनी कदम पर विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार अपनी लोकप्रियता खो चुकी है और जनता के आक्रोश से बचने के लिए चुनावों से भाग रही है। विपक्ष का आरोप है कि पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति करके सरकार ग्रामीण विकास के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रही है।
​आगे क्या?
​अब सबकी नज़रें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यदि सर्वोच्च अदालत हाई कोर्ट के आदेश पर ‘स्टे’ लगा देती है, तो हिमाचल में पंचायत चुनाव लंबे समय के लिए टल सकते हैं। अन्यथा, सरकार को अप्रैल के अंत तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
​हिमाचल की राजनीति और अदालती फैसलों की हर बारीक अपडेट के लिए सब्सक्राइब करें और हमें फॉलो करें। ‘पंजाब दस्तक’ के साथ जुड़े रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *