शिमला, सुरेंद्र राणा: केंद्रीय बजट में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद करने पर विशेष सत्र बुलाने की तैयारी है। आठ फरवरी को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर निर्णय हो सकता है। 15 फरवरी के बाद इस विशेष सत्र को कभी भी बुलाया जा सकता है। विधानसभा का बजट सत्र इस विशेष सत्र के बाद ही बुलाया जाएगा।16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पेश हुए केंद्रीय बजट में राजस्व घाटा अनुदान के प्रावधान को पूरी तरह बंद करने के बाद हिमाचल सरकार को बड़ा झटका लगा है। इससे प्रदेश अपने घाटे की भरपाई नहीं कर पाएगा। साल दर साल प्रदेश का राजस्व घाटा बढ़ता ही जा रहा है।
वित्तायोग की सिफारिश के बाद हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान मिलता रहा है। पंद्रहवें वित्तायोग की सिफारिश पर हिमाचल प्रदेश को करीब 37,199 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला था। यह वर्ष 2021 से लेकर 2026 के बीच निर्धारित किया गया। इसे पांच साल के लिए दिया गया था। वर्ष 2021-22 में 10,249 करोड़ रुपये अनुदान मिला। वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह ग्रांट 9,377 करोड़ रुपये मिली। वर्ष 2023-24 में 8,058 करोड़, 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये जारी हुए। 2025-26 में 31 मार्च तक कुल 3,257 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं। 31 मार्च 2026 के बाद यह अनुदान पूरी तरह बंद हो जाएगा।
एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि आरडीजी को बंद करने के बाद इस संबंध में विशेष सत्र बुलाने की तैयारी है। इस पर राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ही फैसला होगा। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान को बंद कर केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि इस गंभीर विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष इकट्ठा बैठकर चर्चा करें। इसके लिए विशेष सत्र बुलाना चाह रहे हैं। आठ फरवरी की बैठक में ही इस पर निर्णय होगा। अभी विशेष सत्र की तिथियों पर विचार नहीं हुआ है। बजट सत्र इसके बाद ही बुलाया जाएगा।
