पंजाब दस्तक महा-बुलेटिन: धर्मशाला और कांगड़ा की ग्राउंड रिपोर्ट; व्यवस्था और विकास की चुनौतियों पर जनता की बेबाक राय
1. स्मार्ट सिटी धर्मशाला: विकास की धीमी गति से बढ़ी राहगीरों की मुश्किल
धर्मशाला में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स के कारण शहर के मुख्य मार्ग धूल और मलबे से भरे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खुदाई के बाद समय पर मरम्मत न होने से आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। पूरा उत्तर भारत धर्मशाला की ओर रुख करता है, ऐसे में निर्माण कार्यों में तेज़ी लाना अब प्रशासन के लिए अनिवार्य हो गया है।
2. खूनी गड्ढे और बेसहारा पशु: सड़कों पर ‘सफ़र’ बना चुनौती
कांगड़ा जनपद के संपर्क मार्गों पर उभरे गहरे गड्ढे और नेशनल हाईवे पर बेसहारा पशुओं का जमावड़ा हादसों का प्रमुख कारण बन रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि इन गड्ढों और पशुओं को अचानक बचाने के प्रयास में गाड़ियाँ अनियंत्रित होकर टकरा रही हैं। जनता का सवाल है कि इस गंभीर खतरे को दूर करने के लिए प्रशासन ठोस कदम कब उठाएगा?
3. ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का हाल: ‘रेफरल’ सिस्टम से जनता परेशान
विभिन्न विकास खंडों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और आधुनिक सुविधाओं की कमी है। मरीजों का कहना है कि उन्हें छोटे इलाज के लिए भी बड़े अस्पतालों की ओर भागना पड़ता है। जनता चाहती है कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावों का लाभ उन्हें स्थानीय अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं के रूप में मिले।
4. जल और विद्युत आपूर्ति: ग्रामीण अंचलों में सुचारू सेवा की मांग
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की पाइपलाइनें तो बिछ गई हैं, लेकिन जलापूर्ति अनियमित बनी हुई है। साथ ही, बोर्ड परीक्षाओं के इस समय में अघोषित बिजली कटौती ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। जनता का आग्रह है कि विभाग शिकायतों पर त्वरित संज्ञान ले।
5. पर्यटन और व्यवस्था: भविष्य की ओर बढ़ते धर्मशाला की ज़रूरतें
मैक्लोडगंज और ऊपरी धर्मशाला में पार्किंग सुविधाओं का अभाव पर्यटन कारोबार पर बुरा असर डाल रहा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट को समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया, तो पर्यटन नगरी की साख पर प्रभाव पड़ सकता है।
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प्रस्तुति: पंजाब दस्तक टीम
