चिट्टा कारोबारियों पर पंचायत चुनाव लड़ने की रोक, अधिनियम में होगा स्पष्ट प्रावधान

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शिमला, सुरेंद्र राणा: प्रदेश में चिट्टे के कारोबार में संलिप्त लोगों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगेगी। राज्य सरकार इसको लेकर पंचायती राज अधिनियम में स्पष्ट कानूनी प्रावधान करने जा रही है। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने गुरुवार को प्रदेश सचिवालय में प्रेस वार्ता में बताया कि सरकार ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में कानून का रूप दिया जाएगा।मंत्री ने कहा कि चिट्टे के खिलाफ सख्ती बढ़ाते हुए यह तय किया जाएगा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज होगी, वह पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार को लेकर सरकार बेहद गंभीर है और किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल द्वारा उठाए गए संदेह पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि नियमों के तहत यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की संलिप्तता कैसे तय होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिनियम में सीधा प्रावधान जोड़ा जा रहा है, ताकि चिट्टे जैसे नशे के खिलाफ कानूनी तौर पर और अधिक सख्ती की जा सके।प्रदेश की पंचायतों में 31 जनवरी को पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके बाद पंचायती राज संस्थाओं के कामकाज की व्यवस्था को लेकर सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें दो-तीन विकल्पों पर विचार किया गया है। मंत्री ने बताया कि इस ड्राफ्ट पर मंत्रिमंडल में विस्तृत चर्चा के बाद किसी एक प्रारूप को अंतिम रूप देकर 31 जनवरी तक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। ड्राफ्ट तैयार करते समय राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया गया है।

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