धर्मशाला/कांगड़ा, भेषज:हिमाचल की शीतकालीन राजधानी धर्मशाला आज केवल कड़ाके की ठंड की वजह से ही नहीं, बल्कि भीषण राजनीतिक तपिश की वजह से भी चर्चा में है। आज ‘पंजाब दस्तक’ की टीम ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर उस सियासी सरगर्मी को महसूस किया, जो प्रदेश की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाली है।
1. पुलिस भर्ती और ‘अग्निवीर’ फैक्टर:ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान युवाओं में सबसे ज्यादा चर्चा 800 पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती को लेकर दिखी। सरकार का मास्टरस्ट्रोक यहाँ ‘अग्निवीरों’ को प्राथमिकता देना है। हमने देखा कि सेना से लौटे और लौटने की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इस फैसले ने एक नई उम्मीद जगाई है। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि अनुशासित युवाओं को सिस्टम में लाने की एक बड़ी कोशिश है।
2. युवाओं की ‘नेतृत्व फेलोशिप’ और विपक्ष की हुंकार:धर्मशाला के कचहरी चौक से लेकर कचहरी मैदान तक युवाओं का हुजूम पूर्व केंद्रीय मंत्री की ‘नेतृत्व फेलोशिप’ की गूंज सुना रहा था। ग्राउंड पर युवाओं का यह शक्ति प्रदर्शन यह बताने के लिए काफी था कि नई पीढ़ी अब केवल मूकदर्शक नहीं है। फेलोशिप के जरिए एक लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य सीधे तौर पर मिशन 2027 की नींव है।
3. आधी आबादी का ‘सम्मान’ और जमीनी हकीकत:सुलाह क्षेत्र की गलियों में महिलाओं के बीच 1500 रुपये की सम्मान निधि सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ग्राउंड जीरो पर महिलाओं का कहना है कि महंगाई के दौर में यह सीधे बैंक खाते में आने वाली राशि उनके लिए बड़ा संबल है। सरकार ने यहाँ महिला वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने का सफल दांव खेला है।
4. भवारना का ‘नगर पंचायत’ बनना: विकास की नई लकीर:भवारना बाजार में हमारी टीम ने स्थानीय व्यापारियों और निवासियों से बात की। पंचायत से नगर पंचायत बनने के फैसले ने यहाँ के लोगों में उत्साह भर दिया है। लोगों का मानना है कि अब कूड़ा प्रबंधन और बेहतर सड़कों के लिए उन्हें बजट की कमी नहीं खलेगी। यह शहरीकरण की ओर एक बड़ा कदम है।
5. ढगवार मिल्क प्लांट: किसानों की उम्मीदों का केंद्र:कांगड़ा के ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों के बीच ढगवार मिल्क प्लांट का शिलान्यास चर्चा का विषय है। ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि अगर यह प्लांट समय पर तैयार होता है, तो यह कांगड़ा, हमीरपुर और चंबा के हजारों परिवारों की आर्थिकी बदल देगा।
6. एयरपोर्ट विस्तार: विकास और मुआवजे की कशमकश:गग्गल एयरपोर्ट के पास प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पर हमने पाया कि लोग विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी चिंता ‘पुनर्वास’ को लेकर है। प्रशासन ने आज स्पष्ट कर दिया है कि मुआवजा बाजार दर पर मिलेगा, लेकिन ग्राउंड पर चुनौती उन परिवारों को संतुष्ट करने की है जिनकी जड़ें यहाँ दशकों पुरानी हैं।
7. विपक्ष का ‘श्वेत पत्र’ और आर्थिक मोर्चे पर घेराबंदी:सियासी गलियारों में विपक्ष का ‘श्वेत पत्र’ मांगने वाला बयान आज सुर्खियों में रहा। ग्राउंड पर भाजपा कार्यकर्ताओं का आक्रामक रुख यह संकेत दे रहा है कि वे सरकार को कर्ज और आर्थिक प्रबंधन के मुद्दे पर किसी भी हाल में ढील नहीं देने वाले हैं।
8. बिजली बोर्ड का नया डिवीजन: सुलाह की राहत:सुलाह क्षेत्र के लोगों के लिए बिजली बोर्ड का नया डिवीजन कार्यालय किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अब उन्हें तकनीकी शिकायतों के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
9. मिशन 2027 की बिसात: धर्मशाला बनी प्रयोगशाला:पूरे दिन की गतिविधियों का विश्लेषण करें तो यह साफ है कि धर्मशाला को ‘राजनीतिक प्रयोगशाला’ बना दिया गया है। एक ही दिन में सत्ता और विपक्ष के बड़े कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि 2027 की जंग की शुरुआत हो चुकी है।
10. वोट बैंक की कूटनीति:हमने पाया कि आज के हर फैसले और बयान के पीछे वोट बैंक की गहरी कूटनीति छिपी है। युवाओं के लिए फेलोशिप और महिलाओं के लिए सम्मान निधि—ये दोनों ही दल अपनी-अपनी ताकत झोंक रहे हैं।
11. कानून व्यवस्था और नशे का मुद्दा:धर्मशाला की सड़कों पर नशा एक गंभीर चिंता के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री का ‘जीरो टॉलरेंस’ वाला बयान और तस्करों की संपत्तियां कुर्क करने की चेतावनी आज की ग्राउंड रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा है, जिस पर जनता की पैनी नजर है।
12. पंचायत चुनावों का साया:हर वार्ड और हर गली में आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट है। नेताओं के प्रवास ने जमीनी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है, जिसे हम 2027 का ‘सेमीफाइनल’ कह सकते हैं।
