पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया,लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च, विधायिका की जवाबदेही सबसे अहम

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पंजाब दस्तक, सुरेन्द्र राणा। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है और शासन की सभी शक्तियां जनता से ही निकलती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विधायिका जनता की अपेक्षाओं, आवश्यकताओं और हितों के प्रति जवाबदेह नहीं रहती, तो लोकतंत्र केवल नाम मात्र रह जाता है।वे उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा लखनऊ स्थित विधानसभा मंडप में 19 से 21 जनवरी, 2026 तक आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह से पूर्व चर्चा के दौरान बोल रहे थे। “जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही” विषय पर अपने संबोधन में पठानिया ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तीनों स्तंभ—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—जनता के प्रति उत्तरदायी हैं, लेकिन विधायिका की भूमिका विशेष है क्योंकि वही जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व करती है।उन्होंने कहा कि विधायिका कानून निर्माण, नीति निर्धारण और सरकार पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाती है। जनता के हित में कार्य करना, उनकी समस्याओं को समझना और समाधान के लिए कानून बनाना विधायिका की मूल जिम्मेदारी है। यदि विधायिका अपने कर्तव्यों में असफल रहती है, तो जनता चुनाव के माध्यम से परिवर्तन कर सकती है।अपने संबोधन में पठानिया ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के इतिहास और कार्यप्रणाली पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा की अपनी एक समृद्ध परंपरा है। वर्ष 1925 में विश्राम भवन में प्रथम निर्वाचित पीठासीन अधिकारी का चुनाव हुआ था, जबकि 1919 में हल्दीघाटी टैंक हाउस में पहली बार विधानसभा की बैठकें आयोजित हुई थीं। उन्होंने स्मरण कराया कि महिलाओं को मताधिकार देने और अंग्रेजी भारत छोड़ो जैसे प्रस्ताव भी इसी ऐतिहासिक सदन में पारित हुए।पठानिया ने बताया कि वर्ष 1921 में शिमला में पहला पीठासीन अधिकारी सम्मेलन आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा कि आज सदन की बैठकों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा चल रही है और हिमाचल प्रदेश इस दिशा में बेहतर कार्य कर रहा है। वर्ष 1962 में विधानसभा का 182 दिनों का सत्र हुआ था, जबकि पिछले कैलेंडर वर्ष में 35 बैठकें आयोजित की गईं, जिनकी कार्य उत्पादकता 100 प्रतिशत से अधिक रही।उन्होंने कहा कि आज विधानमंडलों में आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा की आधारभूत संरचना प्रभावशाली है और शिमला एवं धर्मशाला में भी इसी प्रकार के विकास कार्य किए जा रहे हैं।इस अवसर पर पठानिया ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष, सरकार और अधिकारियों के आतिथ्य सत्कार के लिए आभार जताया तथा 86वें पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।समारोह से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा आयोजित रात्रि भोज में भी विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया शामिल हुए। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रात्रि भोज में पठानिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर उन्हें टीपीएफआर द्वारा प्रदान सम्मान से अवगत कराया और हिमाचल प्रदेश के पर्यटन विषय पर भी चर्चा की। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी हिमाचली अंगवस्त्र पहनाकर पठानिया को सम्मानित किया।समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, राज्यसभा उपसभापति डॉ. हरिवंश, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने अपने विचार रखे। देशभर की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी, उप-पीठासीन अधिकारी, मंत्री, विधायक और सांसद इस अवसर पर मौजूद रहे।सम्मेलन के उपरांत कुलदीप सिंह पठानिया सहित सभी पीठासीन एवं उप-पीठासीन अधिकारी 22 जनवरी, 2026 को अयोध्या रवाना होंगे, जहां वे श्रीराम मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

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