शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर करवाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत चुनाव टालने की कोई मंशा नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसके लिए कम से कम छह महीने का समय आवश्यक है। सरकार ने दलील दी कि प्रदेश में नई पंचायतों, पंचायत समितियों और नगर निगमों की परिसीमा निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है, जिसके चलते समय पर चुनाव करवाने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं।
इससे पहले मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि पंचायत चुनाव समय पर करवाना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग ने पहले ही सभी उपायुक्तों को चुनाव से संबंधित सामग्री वितरित करने के निर्देश जारी कर दिए थे और 17 नवंबर को प्रदेश में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट भी लागू कर दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने सरकार की दलीलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा या परिसीमा निर्धारण का हवाला देकर चुनाव को अनिश्चितकाल तक टालना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई पंचायतों और जिला परिषदों की परिसीमा निर्धारण की प्रक्रिया चुनाव संपन्न होने के बाद भी जारी रखी जा सकती है।
अब इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव कब और किस समय-सीमा में करवाए जाएंगे।
