VB-G RAM G के ख़िलाफ दुष्प्रचार कर रही कांग्रेस,मोदी सरकार ने हिमाचल में किया दोगुना रोजगार सृजन, वीबी–जी राम जी योजना से गांवों को मिलेगा नया जीवन- बिंदल

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को संशोधित कर VB-G RAM G योजना कर दिया गया है जिसका कांग्रेस विरोध कर रही है।हिमाचल भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस देश भर में VB-G RAM G के ख़िलाफ दुष्प्रचार कर रही है। VB-G RAM G 2025 का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को बढ़ावा देना है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का काम देने की गारंटी दी गई है जो मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है इससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही मजदूरों को साप्ताहिक वेतन दिया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।राजीव बिंदल ने कहा कि योजना का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को बढ़ावा देना है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना। अगर UPA और NDA सरकार के कार्यों की तुलना की जाए, तो यह कई गुना ज़्यादा है। मनरेगा में भी केंद्र की मोदी सरकार ने UPA सरकार से ज़्यादा धन खर्च किया। बिंदल ने दावा किया कि इसे विकसित भारत, 2047 के विजन के साथ तैयार किया गया है और इससे मजदूरों के जीवन के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर में भी बदलाव आएगा। उनकी दलील है कि पहले की योजना में विभिन्न राज्यों से भ्रष्टाचार या घोटाले के आरोप मिल रहे थे। अब नई योजना में पारदर्शिता पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत निगरानी प्रणाली को चुस्त बनाते हुए डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जाएगा। बिंदल

ने कहा कि योजना पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मॉनिटरिंग, छह माह में समीक्षा और समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था की गई है। रोजगार या भुगतान में देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान भी रखा गया है।फंडिंग पैटर्न पर कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र–राज्य अनुपात 90:10 रखा गया है, जो प्रदेश के लिए बड़ा लाभ है, जबकि अन्य राज्यों में यह 60:40 है।आंकड़े प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान 2006 से 2014 तक मनरेगा पर ₹2.13 लाख करोड़ खर्च हुए, जबकि एनडीए सरकार ने 2014 से 2025 के बीच ₹8.53 लाख करोड़ से अधिक खर्च किए। रोजगार सृजन भी यूपीए काल में 1660 मिलियन मंडेज रहा, जबकि मोदी सरकार के दौरान यह बढ़कर 3210 मिलियन मंडेज हो गया।

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