Winter Session : अब चुनाव आयोग पर भी लागू होंगे डिजास्टर एक्ट के प्रावधान

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धर्मशाला, सुरेन्द्र राणा: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में नियम 67 के तीत जारी चर्चा के जवाब में कहा कि डिजाजस्टर एक्ट हटाने पर पंचायत चुनाव करवाए जाएंगे। पंचायतों का पुनर्गठन चल रहा है, जिन्हें दुरुस्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजास्टर एक्ट-2005 राज्य सरकार को व्यापक व अनिवार्य अधिकार प्रदान करता है, जिसमें राज्य सरकार आपदा प्रबंधन के लिए कार्य कर सकती है। इसमें सभी बाध्य निर्देश जारी कर सकती है और उन पर पूर्ण पालन करना अनिवार्य है। किसी विभाग या अथॉरिटी को डिजास्टर की अवस्था में की गई तैयारी, बचाव व अन्य उपायों को मानना होता है। यह प्रावधान सभी नियमों के ऊपर है, किसी भी कानून-नियम के विपरीत होने पर प्रभावी होगा। आज के बाद से चुनाव आयोग पर भी आपदा प्रबंधन एक्ट के आदेश लागू माने जाएंगे। इसके तहत अब चुनाव आयोग कोई भी निर्देश जारी नहीं कर सकता है। डिजाजस्टर एक्ट को राज्य में पूरी तरह से लागू कर दिया गया है, अब एक्ट को हटाने के बाद ही चुनाव करवाए जाएंगे। धर्मशाला के तपोवन में विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पहले दिन से चल रही नियम-67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा का जबाव देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि 18 लोगों ने अपने विचार रखें हैं। लोकतंत्र की व्यवस्था है कि समय के तहत सभी चीजें होनी चाइए। इसके लिए जून में कार्य शुरू किया गया था, जिसमें पुनर्गठन व पुनर्सीमांकन का कार्य किया जा रहा था। इसके लिए छह महीने पहले से कार्य चल रहा था, जबकि 2023 से गंभीर आपदा राज्य में आई, जिससे बहुत अधिक नुकसान राज्य भर में हुआ।इससे राज्य भर सहित मंडी में राहत को कार्य शुरू किया गया। इसी बीच मणिमहेश यात्रा में 10 हजार के करीब लोग यात्री फंसे रहे, सभी लोगों को निकालने के बाद राजस्व मंत्री वहां से आए। मंडी, कुल्लू, चंबा सहित कांगड़ा में भी भयंकर आपदा आई। इस बीच ही डिजास्टर एक्ट लगाया गया। सीएम सुक्खू ने कहा कि सेब सीजन में सडक़ें प्रभावित थीं, जिसमें एपीएमसी के तहत एक सौ करोड़ के सेब पहली बार खरीदे गए, जिससे एक्ट लगाने की परिस्थितियां बनीं। इसके चलते प्रथम कार्य आपदा राहत का ही था। ऐसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत अधिकारी व कर्मचारी राहत कार्य में लगाए जाएंगे, तो चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा गया था। इसमें सीएम ने कहा कि आपदा व सडक़ों को दुरूस्त करने के लिए पंचायत चुनाव में थोड़ा देरी करने की बात कही है। उन्हेांने कहा कि एमसी शिमला के चुनाव जून 2022 से पहले हो जाने चाहिए थे, जबकि वार्ड की संख्या बढ़ाई गई, सिम्मी नंदा ने रिट दी थी। नौ माह तक चुनाव नहीं होने दिए गए, जबकि छह माह में विधानसभा चुनाव नहीं करवाए गए। संविधान के तहत छह महीने पहले हर हाल में चुनाव करवाने होते हैं। चायल चोंक से छतड़ी तक का रोड़ का काम सबसे पहले करवाया गया। मंडी में आपदा आई थी, तो चार लाख की पहली किस्त जारी की गई, जबकि विपक्ष के नेता एक अनिल शर्मा को छोडक़र कोई नहीं आए। उसमें घोषणा की आठ लाख रुपए दिए जाएंगे।आपदा राहत को हेलिकॉप्टर के पांच हजार करोड़ के बिल क्लियर किए हैं। चंद्रताल में फंसे 295 पर्यटकों को निकाला गया। सीएम ने कहा कि विंटर स्कूलों में परीक्षाएं दिंसबर में होनी हैं। स्कूलों को मर्जर करने के फैसले को जनता ने सही बताया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जयराम ठाकुर कह रहे हैं कि सरकार बदलते ही पहली कैबिनेट में इस सरकार के फैसलों की समीक्षा करेंगे, लेकिन पहली कैबिनेट 2027 में होगी या 2028 में, यह किसी को पता नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता भविष्य वक्ता बन गए हैं। अभी दो साल का समय सरकार का शेष है। हम जनता की सेवा के लिए आए हैं। हम आज की सोचकर काम करते हैं। जिस भी पद पर रहा हूं, लंबे समय तक रहा हूं। आगे-आगे देखते जाइए, होता है क्या। सीएम ने कहा कि आपदा प्रबंधन एक्ट जैसे ही हटाएंगे, वैसे ही पंचायत चुनाव कराएंगे।

।सीएम के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया वाकआउट

शीतकालीन सत्र के दौरान पंचायती राज चुनावों के स्थगन पर नियम 67 के तहत हुई चर्चा के बाद सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल के विधायकों ने जमकर नारेबाजी की और सदन से बाहर चले गए। विपक्ष ने चर्चा के दौरान सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगाया। हालांकि मुख्यमंत्री के जवाब के तुरंत बाद विपक्ष के विधायक उनके वक्तव्य से असंतोष व्यक्त करते हुए नारेबाजी करने लगे। विरोध प्रदर्शन के बीच ही, विपक्षी विधायक सदन से बाहर चले गए।

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