शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश के पेंशनर्स एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य सरकार द्वारा जारी की गई नवीनतम महंगाई भत्ते (DA) की अधिसूचना को “अनुचित और अन्यायपूर्ण” बताया है।
संघर्ष समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर, महासचिव इन्द्र पाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा और प्रेस सचिव सैन राम नेगी ने संयुक्त बयान में कहा कि प्रदेश सरकार ने 15 अक्टूबर को जो अतिरिक्त डीए की किस्त जारी की है, उसमें केंद्र सरकार द्वारा घोषित 4% डीए के स्थान पर केवल 3% डीए ही मंजूर किया गया है।
पेंशनर नेताओं ने कहा कि यह निर्णय केंद्र सरकार के मानकों का उल्लंघन है, क्योंकि डीए का निर्धारण केंद्र के श्रम मंत्रालय के लेबर ब्यूरो द्वारा किया जाता है, न कि अलग-अलग राज्यों द्वारा। समिति ने मांग की है कि सरकार तत्काल इस अधिसूचना को वापस ले और 4% डीए की संशोधित अधिसूचना के साथ 1 जुलाई 2023 से 31 मार्च 2025 तक का पूरा एरियर जारी करे।
संघर्ष समिति ने उन लोगों की भी आलोचना की जो 1% डीए के लिए सरकार का धन्यवाद कर रहे हैं। समिति ने कहा, “ऐसे चाटुकार पेंशनरों और कर्मचारियों के हितों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। उन्हें सरकार की प्रशंसा करने के बजाय वास्तविक मुद्दों पर खड़ा होना चाहिए।”
सुरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार का रवैया पेंशनरों के प्रति नकारात्मक और दोहरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो पेंशनर्स जल्द ही सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बुजुर्गों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।”
समिति के अनुसार, सरकार पिछले 8 वर्षों से लाखों रुपये की बकाया राशि देने में टालमटोल कर रही है। कई पेंशनरों की 5 लाख से 45 लाख रुपये तक की एवरेज राशि सरकार पर बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार “वित्तीय संकट” का बहाना बनाकर पेंशनरों को भ्रमित कर रही है, जबकि खुद चेयरमैनों और सलाहकारों की नियुक्तियां कर रही है तथा माननीयों की पेंशन और वेतन में 100% तक की बढ़ोतरी कर चुकी है।
पेंशनर्स समिति ने स्पष्ट किया है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे और अपने अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष की राह अपनाएंगे।
