कैबिनेट निर्णय, पंचायतों का होगा पुनर्गठन, मेयर का कार्यकाल 5 साल, पूरे प्रदेश में लागू होगा स्पेशल पैकेज।

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज हुई हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। सबसे बड़ा फैसला राज्य सरकार ने स्पेशल पैकेज को पूरे प्रदेश में लागू करने का लिया है। अब तक यह राहत राशि केवल मंडी जिला के लिए लागू थी, लेकिन अब पूरे प्रदेश के उन लोगों को राहत दी जाएगी जिनके मकान आपदा के दौरान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि जिन लोगों के मकान पूरी तरह नष्ट हुए हैं, उन्हें चार लाख रुपये की पहली किश्त जारी की जाएगी, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए डेढ़ लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये के स्पेशल पैकेज को लेकर भी चर्चा की गई, लेकिन अब तक केंद्र सरकार से राशि नहीं मिली है। इसके बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से प्रभावितों की मदद करेगी।
कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग में 400 स्टाफ नर्सों के पद सृजित करने को मंजूरी दी। इन पदों पर नियुक्तियां राज्य चयन आयोग के माध्यम से की जाएंगी और इनकी वेतन राशि 25 हजार रुपये प्रतिमाह तय की गई है।

कैबिनेट ने पंचायतों के पुनर्गठन (Reorganization) की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
मंत्रिमंडल ने नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर के कार्यकाल को ढाई साल से बढ़ाकर 5 साल करने की मंजूरी दी। मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि ढाई साल के कार्यकाल के कारण बार-बार हॉर्स ट्रेडिंग की स्थिति बनती थी, इसलिए अब कार्यकाल 5 साल तय किया गया है।

हिमाचल में टूरिज्म इन्वेस्टमेंट प्रमोशन काउंसिल गठित की जाएगी, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं होंगे। यह काउंसिल टूरिज्म एंड सिविल एविएशन विभाग के अधीन काम करेगी।
50 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट की मंजूरी इस काउंसिल से लेनी होगी। इसके साथ ही विभिन्न अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) 14 दिन के भीतर जारी करने की व्यवस्था होगी, ताकि परियोजनाओं में देरी न हो।

कैबिनेट ने प्रथम चरण में कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के 300 पदों को जॉब ट्रेनी के रूप में सृजित करने का निर्णय लिया है। इन पदों को भर्ती निदेशालय के अधीन एक अलग राज्य कैडर के रूप में बनाया जाएगा।

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