दिल्ली: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने छह साल बाद अपनी आर्थिक खुफिया समिति को दोबारा सक्रिय किया है, जिससे आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे, शराब और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाया जा सके। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मल्टी-डिपार्टमेंटल कमेटी ऑन इलेक्शन इंटेलिजेंस की बैठक शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि इससे पहले इस कमेटी की आखिरी बैठक 2019 में हुई थी। बैठक में विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों और केंद्रीय पुलिस बलों की रणनीति को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई। शुक्रवार की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। गौरतलब है कि यह मल्टी-डिपार्टमेंटल कमेटी ऑन इलेक्शन इंटेलिजेंस को वर्ष 2014 के आम चुनाव से पहले बनाया गया था। 2014 से 2019 के बीच यह समिति समय-समय पर सक्रिय रही, लेकिन इसके बाद औपचारिक बैठकें नहीं हुईं। हालांकि एजेंसियां आपस में समन्वय बनाकर चुनावों के दौरान धन-शक्ति पर निगरानी रखती रही हैं। बता दें कि इस समिति में 17 विभाग और एजेंसियां शामिल हैं।
जिनमें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड, ईडी, राजस्व खुफिया निदेशालय, केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो, फायनांशियल इंटेलिजेंस यूनिट, भारतीय रिजर्व बैंक, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स, सीआईएसएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सशस्त्र सीमा बल, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और डाक विभाग शामिल हैं। साथ ही चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात सभी पर्यवेक्षकों ने अपने-अपने आबंटित क्षेत्रों का दौरा किया है। वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और चुनाव अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया की निगरानी, आचार संहिता के पालन और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित हो सके।
