शिमला, सुरेन्द्र राणा
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को शुरू हो गया है। शोकोदगार के बाद विपक्ष ने आपदा को लेकर नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव लाया जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। आपदा में सरकार की भूमिका व राहत कार्य को लेकर सदन में नेता विपक्ष जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री के बीच तीखी नौकझोंक देखने को मिली।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आपदा राहत को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।ल और कहा कि सरकार ने बीजेपी और जनता द्वारा भेजी गई राहत सामग्री को अपना बताने की कोशिश की। मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं के घर तक हेलीकॉप्टर से राशन भेजा गया जबकि सड़कों की बहाली और राहत वितरण में भारी लापरवाही बरती गई।जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार मुकदमों से विपक्ष को दबाना चाहती है लेकिन बीजेपी जनता की मदद जारी रखेगी। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कांग्रेस नेताओं ने भ्रष्टाचार को आपदा में अवसर बना लिया है। नेता प्रतिपक्ष ने प्रभावित परिवारों के लिए अस्थाई शेल्टर बनाने और पारदर्शी राहत कार्य की मांग की।
वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पलटवार करते हुए कहा कि सिराज पहुंचने वाले पहले व्यक्ति वे स्वयं थे और एनडीआरएफ–एसडीआरएफ व हेलिकॉप्टर भी प्रदेश सरकार के आग्रह पर आए। उन्होंने कहा कि केंद्र से अब तक कोई विशेष राहत पैकेज नहीं मिला है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चुनौती दी कि अगर वे आपदा प्रभावितों को एक बीघा जमीन दिलाने में सहयोग करें तो सरकार हर जगह शेल्टर होम बनाने को तैयार है।सुक्खू ने यह भी कहा कि दोषारोपण से काम नहीं चलेगा, बरसात थमने के बाद ही स्थायी समाधान संभव है।
