करुणामूलक आश्रितों की सरकार से गुहार,अब तो नौकरी की उम्र हो रही पार,चार दिवसीय कैबिनेट में लाया जाए एजेंडा,सरकार मजबूर न करे आंदोलन की राह पर उतरने पर

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: नौकरी की आस में लंबे समय से संघर्ष कर करुणामूल्क आश्रित आज सोमवार को कैबिनेट बैठक आरंभ सचिवालय पहुंचे। सरकार से एक बार फिर करुणामूल्क आश्रितों ने गुहार लगाई है कि उनके लिए एक पालिसी बनाकर उन्हें रोजगार उपलब्ध करवाया जाए। आज सोमवार से सचिवालय में चार दिवसीय कैबिनेट बैठक आरंभ हो रही है करुणामूल्क आश्रितों ने मांग की है कि इस कैबिनेट बैठक में उनका एजेंडा लाकर उन्हें राहत प्रदान की जाए। लगभग 20 वर्षों से नौकरी की उम्मीद में करुणामूल्क आश्रित काफी बार संघर्ष और आंदोलन की राह भी अपना चुके हैं बावजूद इसके अभी उनके लिए कोई नीति निर्माण नही किया गया। पूरे प्रदेश भर में लगभग 3200 करुणामूल्क आश्रित हैं ।जिन से कुछ आश्रितों को चतुर्थ श्रेणी के अंतर्गत रोजगार मिला है वावजूद इसके अभी भी 3000 के लगभग करुणामूल्क आश्रित सरकार से नोकरी की आस लगाए बैठे हैं।रविवार को करुणामूल्क आश्रितों का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर नगरोटा में उप मुख्यमंत्री से भी मिला है। विओ : करुणामूल्क संघ की उपाध्यक्ष बॉबी शूटा ने कहा कि वह लंबे समय से सरकार से नौकरी की उम्मीद लगाए हुए हैं। सरकार को बने हुए तीन वराह का समय हो गया गए है।सरकार ने सत्ता में आने से पहले कहा था कि उनके लिए नीति बनाकर रोजगार दिया जाएगा लेकिन आज सभी करुणामूल्क आश्रित ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सरकार से कई मर्तबा वार्ता भी हुई लेकिन अभी तक कोई नतीजा सामने नही आया।अब आज की तारीख में करुणामूल्क आश्रित उम्र की उस दहलीज पर खड़े हैं जहां उनकी नौकरी की उम्र भी निकल रही है।कई आश्रित आब इस लाभ से वंचित रह जाएंगे।उन्होंने कहा कि सरकार से उनका निवेदन है कि आने चार दिन चलने वाली कैबिनेट में करुणामूलकों का एजेंडा लाया जाए व इन परिवारों के साथ न्याय किया जाए । उन्होंने कहा कि सरकार जल्द उन्हें रोजगार मुहैया करवाये ऐसा न हो मजबूरन करुणामूल्क आश्रितों को एक बार फिर आन्दोलन की राह पर उतरना पड़े।

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