सिराज में एक हजार करोड़ का नुकसान, सरकार मदद करने के बजाय दे रही ज़ख्म, सरकार से 10 गुणा ज्यादा भाजपा और समाजसेवी लोगों ने की मदद, पानी, सड़कों की बहाली मे लगेगा समय, बादल फटने की घटनाओं के कारण का अध्ययन करने की जरूरत: जयराम ठाकुर

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शिमला, सुरेंद्र राणा: प्रदेश के मंडी जिला में मानसून में भारी तबाही मचाई है। त्रासदी के बीस दिन बाद भी मंडी के सिराज विधान सभा क्षेत्र में लोग अस्थाई जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पानी और सड़के अभी तक बहाल नहीं हो पाई है। अकेले सिराज विधानसभा क्षेत्र में एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ है लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कुछ मदद नहीं मिली है उल्टे संस्थानों को आपदा के बहाने शिफ्ट किया जा रहा है। यह आरोप नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने मंडी जिला के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर शिमला लौटने के बाद लगाए है।जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की तरफ से राहत व पुनर्वास कार्य उस रफ्तार से नहीं हो रहे हैं जिस तरह से होने चाहिए थे।20 दिन बाद भी कई गांव में बिजली नहीं है। पानी की स्कीमें और सड़क बहाल नहीं हो पाई है।सेब की फसल तैयार है लेकिन सड़के बंद है और पैदल चलने के रास्ते खत्म हो गए हैं।सरकार के मंत्री की तरफ़ से दुर्भाग्यपूर्ण बयान आ रहे हैं जिनका कोई औचित्य नहीं है।सिराज

विधानसभा क्षेत्र में एक हजार करोड़ रुपए का नुक्सान सिराज में हुआ है और 500 मकान पूरी तरह से तबाह हुए हैं जबकि 700 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। पूरे के पूरे गांवों का नामोनिशान मिट गया है।1000 हजार पशुधन खत्म हुआ है।100 पुल पैदल रास्तों के और 18 वाहन के पुल बह गए हैं।जल शक्ति विभाग की 260 में से 240 पानी की स्कीमें बाधित हुई है।42 पंचायत के 30 हजार लोगों प्रभावित हुए हैं। सिराज का शरण गांव पूरी तरह खत्म हो गया है, बगस्याड, सुराह गांव तक जाना ही मुश्किल हो गया है।थुनाग में 200 दुकानें खत्म हुई हैंसरकार

की तरफ से जो प्रयास किए जा रहे हैं वह बेहद कम है। अभी तक आपदा प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की अधिसूचना जारी नहीं हुई है उसमें भी मुख्यमंत्री सोच रहे हैं कि देना है या नहीं देना है। यह वक्त राजनीति का नहीं है। सरकार भूमि का चयन कर आपदा प्रभावितों को कम्युनिटी सेंटर स्थापित करने का कार्य करें। केंद्र की टीम बरसात का मौसम खत्म होने से पहले ही नुकसान का जायजा लेने पहुंची थी और नुकसान को उन्होंने भी माना है। हिमाचल सरकार प्रोजेक्ट विशेष पैकेज की केंद्र सरकार से मांगे करें ताकि केंद्र से मदद मिले।

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