कांच, प्लास्टिक और एल्यूमीनियम पैकिंग में सामान खरीदने पर शुल्क, डिब्बे लौटाने पर वापस मिलेंगे पैसे

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शिमला, सुरेन्द्र राणा; अब प्रदेश में कांच, प्लास्टिक, एल्यूमीनियम की पैकिंग में सामान खरीदने पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा। शुरुआत में कुछ पर्यटन स्थलों में पायलट आधार पर यह योजना लागू की जाएगी। योजना के सफल रहने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है। यह काम किसी निजी कंपनी को सौंपा जाएगा। ऐसी तमाम सामग्री पर क्यूआर कोड होगा। इसी से इसका हिसाब रखा जाएगा। खाली बोतलों, कंटेनरों और डिब्बों को लौटाने पर यह शुल्क रिफंड किया जाएगा।खुले में या वन क्षेत्रों में कांच, प्लास्टिक, एल्यूमीनियम आदि के रूप में जगह-जगह पर पड़े कचरे के निस्तारण के लिए यह फैसला लिया गया है। शनिवार को हिमाचल प्रदेश सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बायोडिग्रेबल कचरे के प्रभावी प्रबंधन और इसमें कमी लाने के लिए डिपॉजिट रिफंड स्कीम-2025 शुरू करने का भी निर्णय लिया गया।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि इस योजना के तहत उपभोक्ता उत्पाद की कीमत के अलावा रिफंड योग्य जमा राशि का भुगतान किया जा सकेगा, जो खाली उत्पाद को वापस करने पर लौटा दी जाएगी। योजना कांच की बोतलों, प्लास्टिक पेय कंटेनरों, एल्यूमीनियम के डिब्बों, तरल पैकेजिंग, लचीली प्लास्टिक पैकेजिंग और बहुस्तरीय पैकेजिंग की एक विस्तृत रेंज पर लागू होगी।कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

सड़कों के किनारे या वन क्षेत्र में पानी की बोतलें, कंटेनर, चिप्स या प्लास्टिक के पैकेट फेंके जाते हैं। एक मामूली सा शुल्क लिया जाएगा। इसे क्लेक्शन सेंटर में एकत्र किया जाएगा। यह योजना ट्रायल तौर पर शुरू होगी। कोई भी चीज खरीदी तो एक शुल्क लगेगा, जब वापस आएंगे तो रिफंड हो जाएगा। यह काम किसी निजी कंपनी को दिया जा सकता है।

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