कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के लिए अटकलों की सियासत तेज

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शिमला, सुरेन्द्र राणा; कांग्रेस अध्यक्ष पद से प्रतिभा सिंह को बदलने की अटकलों को लेकर चल रही सियायत अब और गर्मा गई है। खुद विक्रमादित्य सिंह ने यह माना है कि हाइकमान अध्यक्ष बदल सकती है और नए अध्यक्ष के साथ नई कार्यकारिणी का गठन होगा। इस बदलाव के लिए खुद होलीलॉज भी अब तैयार है, क्योंकि जिस तरह से विक्रमादित्य सिंह ने सोमवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अध्यक्ष बदलने की बात कही है, उससे साफ है कि प्रतिभा सिंह का कार्यकाल पूरा हो चुका है और उन्हें बदला जा रहा है। अब मसला केवल नए अध्यक्ष का है कि आखिर वह किसका होगा। एक तरफ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पसंद को भी पार्टी हाइकमान नजरंदाज नहीं करना चाहती और दूसरी तरफ उसे नेताओं में सामंजस्य भी बिठाना है।ऐसे में कांग्रेस हाइकमान के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो चुकी है। यहां नवंबर महीने से कांग्रेस के पास संगठन नहीं है और अभी तक इस पर फैसला नहीं हो सका है। आने वाले दिनों में यह सियासत और ज्यादा बढ़ेगी, लेकिन इससे पहले 30 मई को कांगे्रस की जयहिंद सभा होनी है। उसके बाद ही दिल्ली में संगठन के मामले को लेकर बैठक होगी, यह तय है।

कुछ मसलों को सुलझाने के लिए हाइकमान वरिष्ठ नेता अजय माकन को यहां भेज रही है, जो नेताओं से इस विषय पर भी चर्चा करेंगे।रबड़ स्टैंप नहीं, दमदार को कुर्सी देनी चाहिए।

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष कोई दमदार और मजबूत नेता होना चाहिए और कोई रबड़ स्टैंप नहीं चलेगा। इस मामले को लेकर विक्रमादित्य सिंह ने सोमवार को कुछ बड़ी बातें कहीं हैं, जिससे पार्टी के भीतर एक बार फिर से सियासत गर्मा गई है। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व क्षमता रखने वाले नेता को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष पार्टी का ऐसा कार्यकर्ता या नेता बनना चाहिए, जिसकी कम से कम तीन से चार जिलों में मजबूत पकड़ हो। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कमजोर नेतृत्व वाले व्यक्ति की नियुक्ति संगठन के हित में नहीं होगी। उनके इस बयान को लेकर कई मायने निकाले जा रहे हैं।

फिलहाल यह तय हो गया है कि प्रतिभा सिंह को इस पद से हटाया जा रहा है। विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा है कि पहले भी प्रतिभा सिंह ने अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया था, मगर तब विपरीत परिस्थितियां थीं और पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी। वह मंडी से लोकसभा का उपचुनाव जीतकर आईं और फिर यहां कांग्रेस सत्ता में आई। उन्होंने एक सवाल पर यह भी कहा कि वह हाइकमान के आभारी हैं कि उन्हें मंत्री बनाया गया और सरकार में उन्हें महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।

राज्य अध्यक्ष की दौड़ में कसौली से विनोद सुल्तानपुरी, कांगड़ा से यादविंद्र गोमा, शिमला के ठियोग से कुलदीप राठौर, अनिरुद्ध सिंह सहित कई नेताओं का नाम चर्चा में है। कुलदीप राठौर कांग्रेस पार्टी के पहले भी अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी का एक धड़ा जिसमें कुछ विधायक व मंत्री भी शामिल हैं, वे दोबारा राज्य अध्यक्ष की कमान कुलदीप राठौर को सौंपने के पक्षधर हैं। वहीं, विनोद सुल्तानपुरी भी अध्यक्ष की दौड़ में हैं। इसका कारण यह है कि हाइकमान दलित चेहरे पर दांव खेल सकता है, इसलिए वह इस दौड़ में आगे हैं। मंत्रियों ने पहले ही अपना मंत्रिपद छोडऩे से इनकार कर दिया है। यहां मुख्यमंत्री की पसंद के कुछ नेताओं के नाम भी सामने आए हैं, लेकिन सभी वरिष्ठ नेताओं में सामंजस्य बिठाकर ही पार्टी अध्यक्ष का चयन होगा।

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