पाकिस्तान पर अब प्रतिबंधों का प्रहार, दुश्मन देश में मचेगा हाहाकार

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दिल्ली:पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारतीय सेना की संभावित कार्रवाई से बुरी तरह डरे पाकिस्तान के आतंकियों और रेंजर्स की धुक-धुक दिन बीतने के साथ-साथ बढ़ती जा रही है। इसी बीच भारत सरकार ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक हमला जारी रख है। भारत सरकार की तरफ से शनिवार को पाकिस्तान के कारोबर पर ट्रिपल अटैक किया गया है। एक ही दिन में पाकिस्तान के खिलाफ तीन ऐसे कदम उठाए गए हैं, जिसके चलते पहले से कंगाल पाकिस्तान दाने-दाने के लिए तरसने की स्थिति में आ सकता है। भारत सरकार की तरफ से निर्णय लिया गया है कि पाकिस्तान का कोई भी जहाज भारतीय पोर्ट पर एंट्री नहीं लेगा। पाकिस्तानी कॉमर्शियल शिप की भारत के सभी पोर्ट पर एंट्री को बैन कर दिया गया है। सरकारी आदेश में कहा गया है कि पाकिस्तान का फ्लैग लगे किसी भी जहाज को भारतीय पोर्ट पर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसा पाकिस्तान के साथ ट्रेड को पूरी तरह से खत्म करने के निर्णय का और मजबूत से पालन करने के लिए लिया गया है।पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर करारा प्रहार करते हुए भारत ने पड़ोसी देश से होने वाले सभी इनडायरेक्ट इंपोर्ट को भी बंद कर दिया है।

पाकिस्तान से कोई भी सामान आयात नहीं होगा, चाहे यह जैसे दुबई या सिंगापुर जैसे दूसरे देशों से आएगा, तो भी उस पर बैन रहेगा। पहले डायरेक्ट ट्रेड बंद था, लेकिन अब इनडायरेक्ट ट्रेड भी रोका जा रहा है। इससे पाकिस्तान को सालाना करीब 10 अरब डालर का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस निर्णय के बाद अब पाकिस्तान किसी दूसरे देश के जरिए भी भारत की दवाएं नहीं खरीद पाएगा। इसके साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ तीसरा प्रहार करते हुए भारत सरकार ने पड़ोसी देश के साथ जुड़ी डाक सेवाओं यानी पोस्टल सर्विसेज को भी पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया है। अब भारत और पाकिस्तान के बीच पत्र, पार्सल और दस्तावेजों का आदान-प्रदान पूरी तरह रुक गया है। इससे पहले 2019 के पुलवामा हमले और 1971 के युद्ध के दौरान भी डाक सेवाएं ऐसे ही बंद कर दी गई थी। इस कदम से पाकिस्तान के छोटे व्यापारियों, ई-कॉमर्स और आम नागरिकों को बड़ा झटका लगेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे अधिक प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा, जो दोनों देशों के बीच पारिवारिक या व्यापारिक पत्राचार पर निर्भर हैं। इसके अलावा, यह कदम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि भारत से आयात होने वाले कुछ सामानों का परिवहन डाक सेवाओं के माध्यम से होता था।

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