शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश में अब राजनीति की जंग व्यक्तिगत खुन्नस तक पहुंच गई है। पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने बुधवार को हमीरपुर में पत्रकार वार्ता कर मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस प्रशासन पर सीधे तौर पर हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बेटे और पत्नी के खिलाफ सिरमौर जिला के पच्छाद में दर्ज की गई एफआईआर बदले की गंदी राजनीति का हिस्सा है। सबूतों के साथ राजेंद्र राणा ने खुलासा किया कि 2020 में शिमला के मशोबरा निवासी अनिल चौहान ने उनसे संपर्क कर सिरमौर के पच्छाद में क्रशर प्लांट में साझेदारी की पेशकश की थी। इस समझौते के तहत उनके बेटे और पत्नी का 25-25 प्रतिशत हिस्सा तय हुआ था।
राणा के मुताबिक, अढ़ाई से तीन करोड़ रुपए की पूरी भुगतान करने के बावजूद अनिल चौहान क्रशर प्लांट शुरू करने के बजाय बहाने बना कर टाल मटोल करता रहा और पैसे अपनी जेब में डालता रहा।जब उससे या तो प्लांट लगाने या पैसे लौटाने को कहा गया, तो उसका रवैया ही बदल गया। श्री राणा ने बताया कि साझेदारी के तहत उनके बेटे ने एक जेसीबी मशीन खरीदी थी, ताकि काम में आसानी हो। लेकिन अनिल चौहान ने बिना इजाजत यह मशीन रोहडू के पास किसी को छह महीने किराए पर दिए रखी और उससे मिलने वाला पैसा भी खुद लेता रहा। जब इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, तो राणा के बेटे ने पच्छाद पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस के दखल के बाद यह जेसीबी उनके बेटे को वापस दिलाई गई, जो पूरी तरह कानूनी रूप से उनकी संपत्ति थी।
हैरानी की बात यह है कि अब उसी पुलिस ने सीएम ऑफिस की दखल अंदाजी से उन्हीं के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कर दिया। श्री राणा ने बताया कि अनिल चौहान के खिलाफ पंजाब के मोहाली में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई गई थी। दो महीने की जांच के बाद 12 मार्च को उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ और अनिल चौहान को तलब किया गया। श्री राणा ने साफ कर दिया कि वह किसी भी सरकारी तानाशाही से डरने वाले नहीं हैं।
