हिमाचल से चौथी महिला लोकसभा सांसद बनीं कंगना

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शिमला,सुरेंद्र राणा: पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में अब लोकसभा की दहलीज लांघने वाली चार बार की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कंगना राणौत चौथी व गैर-राजघराने और भाजपा की टिकट से जीतने वाली पहली महिला सांसद बन गई है। इससे पहले तक हिमाचल से मात्र तीन महिलाएं ही लोकसभा में पहुंची थी, जो कि तीनों ही राजघराने से संबंध रखती थी, जिसमें राजकुमारी अमृत कौर 1952 में मंडी, चंद्रेश कुमारी 1984 में कांगड़ा व प्रतिभा सिंह मंडी से 2004, 2013 व 2021 के उपचुनावों में लोकसभा सांसद रही हैं। ऐसे में हिमाचल से गैर-राजघराने की पहली महिला सांसद बनकर बॉलीवुड की क्वीन कंगना राणौत लोकसभा में पहुंच रही है।

हालांकि कंगना राजघराने से संबंध नहीं रखती है, लेकिन बॉलीवुड सहित देश-विदेश में भी कंगना को क्वीन यानी रानी के नाम से ही जाना जाता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश से पहली बार भाजपा ने किसी महिला प्रत्याशी को टिकट थमाया है और वह भाजपा की पहली सांसद के रूप में लोकसभा में पहुंच रही हैं। हालांकि इस बार चुनावों में मंडी से भाजपा की कंगना के अलावा कांगड़ा से बसपा की रेखा चौधरी और मंडी से ही आजाद के रूप में राखी गुप्ता चुनावी मैदान में उतरी हुई थी।

वहीं राज्य के शिमला व हमीरपुर लोकसभा सीट से एक भी महिला उम्मीदवार को भाजपा-कांग्रेस व वहां के लोगों ने सांसद के रूप में चुनने में कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

वहीं कांगड़ा दुर्ग में लोकसभा में मात्र एक बार ही 1984 में आधी आबादी यानी महिला सांसद के हाथों में जनता ने कमान सौंपी है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस ने तीन बार महिला उम्मीदवार को टिकट सौंपा है। जबकि बीजेपी ने अब तक एक बार भी महिला उम्मीदवार पर दांव नहीं खेला है। वहीं अब तक कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी ने कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र से तीन बार चुनाव लड़े हैं, जिसमें 1984 में एक बार विजय रही हैं। वहीं चंद्रेश कुमारी के अलावा वर्ष 1971 से वर्ष 2019 तक के आम चुनावों में अन्य राजनीतिक दलों ने महिलाओं पर विश्वास कम जताया है, जबकि दो महिला उम्मीदवारों ने आजाद के रूप में मैदान में उतरने का दम दिखाया था।

उक्त में से मात्र एक ही बार 1984 में चंद्रेश कुमारी कटोच को ही कांगड़ा-चंबा की जनता ने चुनकर दिल्ली संसद में भेजा है। जबकि राज्य भर से मात्र मंडी से ही राजकुमारी अमृत कौर व प्रतिभा सिंह एक बार लोस चुनावों जबकि दो बार उप-चुनावों में ही विजेता बनी है। हालांकि राज्यसभा में हिमाचल से महिलाएं सांसद रही हैं। वहीं, अब केंद्र सरकार की ओर से 33 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। हालांकि इससे प्रावधानों को जनगणना के बाद ही लागू किए जाने की बात कही गई है।

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