शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के पास बहुमत होने के बावजूद राज्यसभा की सीट भाजपा की झोली में जाने से प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सुबह मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया, लेकिन शाम को वापस ले लिया। भाजपा के 15 विधायक सदन ने निलंबित कर दिए गए।
प्रदेश कांग्रेस में मची सियासी हलचल के बाद सुक्खू सरकार में लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार सुबह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और देर शाम को इसे वापस भी ले लिया। विक्रमादित्य पार्टी पर्यवेक्षकों से मिलने के बाद कहा कि मुख्यमंत्री और पार्टी हाईकमान से चर्चा के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लेने का फैसला लिया है। पार्टी सर्वोपरि होती है। जिन मुद्दों को लेकर मेरी नाराजगी थी, उनके बारे में मुख्यमंत्री और हाईकमान को अवगत करवा दिया है। हिमाचल में पार्टी पूरी तरह से एकजुट है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पर्यवेक्षकों के साथ बैठक संपन्न होने के बाद कहा कि हमारी सरकार सुरक्षित है। कहा कि बैठक में चुनाव से संबंधित चर्चा हुई।
उधर, शिमला हिमाचल प्रदेश के शिमला में बीजेपी विधायक दल की बैठक चल रही है। पार्टी विधायक रीना कश्यप ने कहा कि जो सरकार व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रही है, अब उनके जाने का समय आ गया है।
दल-बदल कानून में राज्य सरकार की ओर से की दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा गया। बागी छह कांग्रेस विधायकों राजेंद्र राणा, सुधीर शर्मा, चैतन्य शर्मा, देवेंद्र कुमार भुट्टो, इंद्र दत्त लखनपाल और रवि ठाकुर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतपाल जैन विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के समक्ष पेश हुए। सरकार के अधिवक्ता भी उनके समक्ष उपस्थित हुए। वहीं, सुनवाई के बाद प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि दोनों पक्षों को विस्तृत रूप से सुना है। उसके बाद उन्होंने अपने फैसले को अपने पास सुरक्षित रखा है। भाजपा की ओर से पेश हुए वकील सतपाल जैन ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सुबह छह विधायकों को दल-बदल कानून के तहत कारण बताओ नोटिस दिया था। डेढ़ बजे उन्होंने पेश होना था तो उस वक्त छहों विधायकों की ओर से वह पेश हुए। उन्होंने लिखकर उनसे निवेदन किया कि याचिका की प्रति नहीं मिली है। केवल नोटिस मिला है। सात दिन का वक्त दिया जाए, जिससे कि वे जवाब दायर कर सकें। विधानसभा की ओर से बनाए गए एंटी डिफेक्शन रूल-7 के तहत जिसके खिलाफ याचिका आती है, उसे जवाब देने के लिए सात दिन का वक्त देने का प्रावधान है। उन्होंने डेढ़ बजे लिखकर दरख्वास्त दी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कोई भी ऐसा व्यवहार नहीं किया, जो इस नियम के तहत आता हो। डेढ़ बजे सुनवाई शुरू हुई। चार बजे रिकॉर्ड का निरीक्षण करने को कहा। याचिका की प्रति बहस खत्म होने के बाद दी गई है। उन्हें कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं को बात करने का अधिकार है। उन्होंने अपनी याचिका को रिजर्व किया है। उन्हें पूरा विश्वास है कि स्पीकर पद की गरिमा का ध्यान रखेंगे। राज्यसभा चुनाव में कौन कहां वोट डालता है, इसके आधार पर डिस्कवालिफिकेशन नहीं किया जा सकता है।
