एसवाईएल पर पंजाब-हरियाणा के बीच बैठक बेनतीजा, मान बोले- पंजाब डार्क जाने में, देने को पानी नहीं

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पंजाब दस्तक, सुरेंद्र राणा: पंजाब और हरियाणा के बीच सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर बनाने के मुद्दे पर गुरुवार को हुई बैठक भी बेनतीजा रही। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मसले पर राज्य के पुराने स्टैंड पर कायम रहते हुए साफ कर दिया कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ एक घंटे से भी अधिक समय तक चली बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में मैं कह रहा हूं कि हमारे पास किसी को बांटने के लिए पानी नहीं है। मैंने बैठक में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को इस बारे में अवगत कराया है कि हम अपने पहले रुख पर कायम हैं कि हमारे पास पानी नहीं है।’

मान ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री का कहना था कि वह पानी की बात नहीं करने आए, पंजाब पहले एसवाईएल नहर बना दे, उसके बाद देखेंगे। मान ने कहा कि जब हमारे पास देने को पानी ही नहीं है तो नहर बनाने का क्या फायदा? इस बैठक में पंजाब और हरियाणा के उच्चाधिकारी भी शामिल थे।

चार जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेगा पंजाब

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री मान ने कहा कि इस मामले में पंजाब चार जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट फाइल करेंगे। दुनियाभर में प्रत्येक 25 साल बाद रिपेरियन मामलों की समीक्षा होती है लेकिन पंजाब के मामले में केंद्र सरकार ने कभी इसकी समीक्षा नहीं की। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिनाब से रावी तक इंडस समझौता था, जिसके तहत चिनाब से रावी के बीच एक सुरंग बनाई जानी थी, जिसके जरिये पांच एमएएफ पानी पंजाब को मिल सकता था लेकिन केंद्र सरकार ने आज तक उस सुरंग का निर्माण नहीं कराया।

पंजाब को तय शर्तों से कम पानी

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हरियाणा के पास पानी के लिए कई चैनल हैं। यमुना-शारदा लिंक से उन्हें पानी मिलता है, जबकि पंजाब के पास सतलुज दरिया अब एक नाले में तब्दील हो चुका है। तय शर्तों के अनुसार पंजाब को 52 एमएएफ (मिलियन एकड़ फीट) पानी मिलना चाहिए लेकिन इस समय केवल 14.5 एमएएफ पानी ही मिल रहा है। भूजल भी 600-700 फुट तक गिर चुका है और पंजाब डार्क जोन में है। जिस हॉर्सपावर की मशीन से आज पंजाब को जमीन से पानी निकालना पड़ रहा है, उतनी गहराई से दुबई में जमीन से तेल निकाला जाता है। उन्होंने दोहराया कि एसवाईएल बनाने का कोई औचित्य नहीं है।

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