शिमला, सुरेंद्र राणा: प्रदेश पर पूर्व सरकार द्वारा 75 हजार करोड़ का कर्ज का बोझ लादने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस सरकार अब आठ सौ करोड़ का और कर्ज लेने जा रही है। अगले दस सालों में प्रदेश की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ कर्ज मुक्त करने के पूर्व में दिए गए मुख्यमंत्री के बयान अब लगातार लिए जा रहे कर्ज के बाद प्रदेश को कर्ज मुक्त कैसे किया जायेगा यह भविष्य ही बताएगा। लेकिन सरकार आर्थिक हालातों को ठीक न होने के बाद आठ सौ करोड़ का कर्ज लेगी जिस से प्रदेश के खर्चे चलाए जाएंगे। केंद्र ने प्रदेश के कर्ज की लिमिट को घटा दिया है। जिस पर पक्ष विपक्ष आमने सामने है।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी सरकार पर पलटवार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेता इन दिनों दिल्ली में केंद्र नेताओं को जाकर बुके देते हैं और फिर वापस लौट कर केंद्र में नेताओं को गाली देने का काम करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रदेश वापसी होने के साथ ही बजट का रोना रोने लग जाते हैं, जो सरासर गलत है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश को अपना दूसरा घर मानते हैं और प्रदेश के विकास में कभी कोई कमी नहीं आने देते।
हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार बनने के बाद प्रदेश पर कर्ज़ का मुद्दा लगातार चर्चाओं में रहा है। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल पर 75 हज़ार करोड़ रुपए का कर्ज़ होने की बात कहते रहे। वहीं, बीजेपी सरकार के दौरान प्रदेश पर 69 हज़ार 600 करोड़ रुपए के कर्ज होने की बात बताती रही है विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, हिमाचल पर अब तक 71 हज़ार 082 करोड़ रुपए का कर्ज है। मौजूदा समय में हिमाचल पर औसतन 95 हज़ार 374 रुपए प्रति व्यक्ति कर्ज़ है।
