अकाली दल का पलटवार, कहा- भाजपा से गठबंधन का कोई इरादा नहीं, बसपा के साथ अच्छा चल रहा

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पंजाब दस्तक, सुरेंद्र राणा: भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में किसी भी दल से गठबंधन करने से इन्कार कर दिया है। हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के साथ फिर से गठबंधन की चर्चा लोगों के बीच होने लगी थी। मगर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह कहते हुए सभी कयासों को खारिज कर दिया था कि अकाली दल के पास कुछ नहीं बचा है। अब शिरोमणी अकाली दल (शिअद) ने पलटवार किया है। शिअद का कहना है कि भाजपा के साथ गठबंधन करने की कोई इच्छा नहीं है।

सोमवार को इस मुददे पर भाजपा के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिअद के प्रवक्ता और सीनियर नेता महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि अकाली दल का पंजाब में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन बहुत अच्छा चल रहा है और पार्टी का किसी अन्य दल के साथ गठबंधन करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अकाली दल ने कभी भी भाजपा के साथ भविष्य में गठबंधन करने की बात नहीं कही और भाजपा को हर रोज इस मुददे पर अटकलें बंद कर देनी चाहिए।

ग्रेवाल ने भाजपा को याद दिलाया कि अकाली दल ने भगवा पार्टी के साथ गठबंधन को सैद्धांतिक आधार पर तोड़ा था, जब उन्होंने अपने गठबंधन सहयोगी या हितधारकों-किसानों के साथ चर्चा किए बिना संसद में कृषि पर तीनों काले कानूनों को लागू करके अन्नदाता के साथ धोखा किया था। इसके बाद भाजपा ने पंजाब और सिख समुदाय दोनों को नुकसान पहुंचाने के लिए एक के बाद एक फैसले लिए, जिसके परिणामस्वरूप पंजाबियों में बेहद बैचेनी की भावना पैदा हुई।

अकाली नेता ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को तोड़कर हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा कमेटी बनाते हुए एसजीपीसी के चुनाव में दखल देना प्रमुख है। उन्होंने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार भी श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी बंदी सिंहों को रिहा करने के वादे से पीछे हट गई। इससे पूरे सिख समुदाय में रोष है।

ग्रेवाल ने कहा कि इसके अलावा भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा से बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने के अलावा बीबीएमबी के सदस्यों की नियुक्ति में पंजाब के अधिकारों की अनदेखी करके संघीय ढांचे को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पंजाबी को सीबीएसई में एक मामूली विषय के रूप में शामिल करना और राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में हस्तक्षेप किया है।

 

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