सेब की सघन खेती की ओर बढ़ा:हिमाचल में इस साल 10 फीसदी ज्यादा सेब कारोबार 6 हजार करोड़ पहुंचने के आसार

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चंडीगढ़, सुरेंद्र राणा,हिमाचल में संपन्नता लाने वाले सेब बाजार को खुशखबरी देने के लिए तैयार हैं। भले ही इस बार बंपर फसल नहीं है पर मार्केट में उछाल के कारण बागवानों को निराश नहीं होना पड़ेगा। हालांकि अभी सीजन पीक पर नहीं आया है, पर शुरुआती रुझानों में बागवानों को सेब के दाम 100 से 150 रु. प्रति किलो मिल रहे हैं।

15 अगस्त के बाद सीजन रफ्तार पकड़ेगा। हिमाचल में सेब की 6000 करोड़ रुपए की इकोनॉमी है। राज्य की बागवानी की जीडीपी में 7-8% है। सेब उत्पादन में बागवानी में का हिस्सा 80% से ज्यादा है। बागवानी विभाग का कहना है कि इस बार कारोबार लक्ष्य से ऊपर होगा, ओले नहीं गिरे तो मार्केट अच्छा रिस्पांस देगा।

50-60 लाख पेटियां ज्यादा होने का अनुमान

अर्थशास्त्र व सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक अनुपम शर्मा कहते हैं कि पिछले साल 6.2 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन हुआ था, 3.5 करोड़ पेटियां आई थी। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा कि इस साल 50-60 लाख पेटियां ज्यादा आने की संभावना है। यानी आंकड़ा 4 करोड़ के पार पहुंच जाएगा। यह पिछले साल की तुलना में 10% ज्यादा है। प्रगतिशील युवा बागवान और एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष कृष जनारथा ने बताया कि प्रतिस्पर्धा के दौर में लोग अब बीजू परंपरागत पौधों की बजाय इटली के रूट्स स्टॉक को तरजीह दे रहे हैं। एम 9 का रूट्स स्टॉक वर्ल्ड वाइड है।

यह पौधा 60% नर्सरी से बनकर आता है। 2 साल बाद भी यह फल देना शुरू कर देता है। मार्केट में लो हाइट के सेब के अच्छे दाम मिल रहे हैं। बागवान सेब का आकार और रंग बनने दें तो मार्केट में इसके और अच्छे दाम मिल सकते हैं। शुरूआत में 10 किलो की पेटी 2000 रुपए तक में बिकी।

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