शिमला, सुरेंदर राणा,हिमाचल में सेब का सीजन शुरू हो गया है. प्रदेस में इस बार सेब की बंपर फसल है, लेकिन GST का स्लैब 6 से 12 फीसदी किया गया, जिसके बाद सेब की पैकिंग सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है.हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन की शुरुआत के साथ ही बागवानों की समस्याएं बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. सेब की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली पेटी और ट्रे दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है. बीते सीजन के मुकाबले सेब बागवानों को इस साल एक पेटी खरीदने के लिए 150 से 200 रुपये अतिरिक्त खर्चा करना पड़ रहा है. पहले कोरोना और फिर आर्थिक मंदी की मार झेल रहे किसानों के सामने एक और भयावह समस्या पैदा हो गई है.
केंद्र सरकार ने कार्टन पर पहले GST का स्लैब 6 से 12 फीसदी किया. इसके बाद इसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर किया गया. इससे सेब की पैकेजिंग सामग्री दोगुनी महंगी हो गई है. इस बार पेटी ओर ट्रे के दाम बढ़ने से लागत 150 से ज्यादा हो गई है. सेब की पैकिंग सामग्री महंगी होने की वजह से कई बागवान मंडियों में शराब की पेटी में सब कर लाने के लिए मजबूर हो गए हैं.
बीते दिन शिमला भट्टाकुफर मंडी में एक बागबान शराब की पेटी में सेव लेकर पहुंचा था, जिसे देख आढ़ती भी हैरान हो गए थे. बीते साल सेब की पेटी 58 रुपये तक मिल रही थी और अब दाम बढ़ने से 75 रुपये से भी अधिक मिल रही है. ऐसे में इस बार सेब पर लागत बढ़ने से बागवानों की मुश्किलें बढ़ गई है.
हिमाचल प्रदेश सरकार में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी मामला केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष उठाने की बात कही है. भारद्वाज ने बागवानों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को जल्द सुलझा लिया जाएगा.
